ब्लॉगसेतु

ज्योति  देहलीवाल
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मेरे घर पर एक परिचिता आई हुई थी। उसने मुझ से कहा, ''ज्योति, तुम मटके पर लोटा औंधा क्यों रखती हो? मटके पर लोटा औंधा नहीं रखना चाहिए। लोटे में थोड़ा सा ही सही लेकिन पानी जरुर रखना चाहिए। नहीं तो अपशकुन होता हैं!'' ''मटके पर लोटा हम अपनी सुविधानुसार कैसे भी रखे, उ...
mahendra verma
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पिछले दिनों भूतविद्या समावार पत्रों की सुर्खियाँ बनी रहीं । कुछ ने इसे भूत-प्रेत से संबंधित बताया तो कुछ ने इसे मनोचिकित्सा से संबंधित विद्या कहा । कुछ अतिउत्साही लोगों ने तो इसे पंचमहाभूतों की विद्या भी बता दिया । चूंकि भूतविद्या आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से संबंधि...
ज्योति  देहलीवाल
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दुनिया में ऐसे कई वैज्ञानिक, डॉक्टर और इंजीनियर जैसे पढ़े-लिखे लोग हैं, जिनका मन बिल्ली के रास्ता काटने पर आज भी शंकाग्रस्त हो उठता हैं कि कहीं कोई अनहोनी तो नहीं होगी? घर से निकलते वक्त छींक आने पर मन में आशंका होने लगती हैं कि कुछ अमंगल तो नहीं होगा? अंधविश्वास सि...
 पोस्ट लेवल : अंधविश्वास धार्मिक
Sanjay  Grover
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यह अद्भुत है।कबीरदास जो जिंदग़ी-भर अंधविश्वासों का विरोध करते रहे उनकी जब मृत्यु हुई तो उनके हिंदू और मुस्लिम शिष्य उनका अंतिम संस्कार अपने-अपने तरीक़े से करने के लिए लड़ने लगे। जब उन्होंने लाश पर से चादर हटाई तो नीचे से फूल निकल आए जिन्हें शिष्यों ने आधा-आधा बांट लिय...
ज्योति  देहलीवाल
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क्या आपको भी लगता हैं कि छींक आने से अपशकुन होता हैं? शुभ कार्य के लिए घर से निकलते वक्त यदि किसी को छींक आ जाएं तो दो मिनट रुक जाना चाहिए, नहीं तो कोई न कोई अनहोनी होती हैं? यदि हाँ, तो जानिए कि क्या वास्तव में छींक आने से अपशकुन होता हैं? एक बार मैं एक परिचि...
mahendra verma
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आम तौर पर यह समझा जाता है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण का संबंध केवल वैज्ञानिकों से है,  ऐसा बिल्कुल नहीं है । वास्तव में वैज्ञानिक दृष्टिकोण जीवन जीने का एक तरीका है ( सोचने की एक व्यक्तिगत और सामाजिक प्रक्रिया ) जो वैज्ञानिक विधि का उपयोग करता है और जिसके परिणामस्...
mahendra verma
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एक वाक्य में अंधविश्वास को परिभाषित करना मुश्किल है क्योंकि इसका क्षेत्र बहुत व्यापक है । मोटे तौर पर कह सकते हैं कि ‘तर्कहीन विश्वास’ अंधविश्वास है । अपने विकास क्रम में जब मनुष्य थोड़ा सोचने-समझने लायक हुआ तब ज्ञान और तर्क का जन्म नहीं हुआ था । इन के अभाव में घटना...
ज्योति  देहलीवाल
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मॉल में घुमते हुए शिल्पा को उसकी प्रिय सहेली उषा मिल गई। दो-तीन साल बाद अचानक मुलाकात होने पर उसकी खुशी का पारावार नहीं था। 'कैसी हो उषा?'  'अरे, पुछ मत यार...बहुत टेंशन हैं।'  'टेंशन? किस बात का टेंशन हैं?' 'वो मेरा बेटा दिपक...' 'क्यों, क्या हुआ दिपक को...
ज्योति  देहलीवाल
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kya aaj bhi kanyadaan ke rasm ki jarurat hai? दोस्तों, जैसा कि मैंने अपनी एक पोस्ट "सकारात्मक पहल- एक विधवा ने किया अपनी बेटी का कन्यादान!!" में कहा था कि मैं कन्यादान के रस्म के बारे में चर्चा करूंगी...तो आज हम यह चर्चा करते हैं कि क्या आज भी 'कन्यादान'...
ज्योति  देहलीवाल
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क्या आपको पूर्ण विश्वास हैं कि शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य हमेशा शुभ ही होते हैं? शुभ मुहूर्त में शुरु किए गए कार्यों से ही पूर्ण सफलता संभव हो सकती हैं? नई गाड़ी खरीदनी हो, भुमिपूजन करना हो, गृह प्रवेश करना हो या अन्य कोई मांगलिक कार्य हो...प्राय: ये सभी कार्य लोग...