ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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चीनी वायरस कोरोना के कारण जन-जीवन अस्तव्यस्त होता नजर आ रहा है. लॉकडाउन के चार चरणों के बाद जब देश में अनलॉक की प्रक्रिया आरम्भ हुई तो भी लोगों में एक तरह का डर बैठा हुआ है. ये और बात है कि बहुत से लोग इस डर का प्रदर्शन कर दे रहे हैं और बहुत से इसे छिपाने में सफल ह...
अजय  कुमार झा
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पिछले एक सप्ताह के एकांतवास में ,छत पर अपनी बगिया में सत्तर अस्सी पौधे लगा चुका हूँ | फूल पत्तों के अलावा फिलहाल तोरी ,भिंडी ,घीया ,पालक ,धनिया ,नीम्बू मिर्च सब उगाई लगाई जा रही है | दिन का  अधिक समय छत पर बनी इस बगिया नुमा आँगन में ही बीत रहा है | सुबह शाम झा...
kumarendra singh sengar
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आत्महत्या एक ऐसा शब्द है जो सिवाय झकझोरने के और कोई भाव पैदा नहीं करता. यह महज एक शब्द नहीं बल्कि अनेकानेक उथल-पुथल भरी भावनाओं का, विचारों का समुच्चय है. यह शब्द मौत की सूचना देता है. किसी व्यक्ति के चले जाने की खबर देता है. सम्बंधित व्यक्ति के परिचितों के दुखी हो...
kumarendra singh sengar
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एक कार्यक्रम में एक विशेषज्ञ युवाओं और किशोरों से सम्बंधित समस्या पर प्रकाश डाल रहे थे. बातचीत के दौरान उन्होंने आत्महत्या के दो बिंदु बताये. उनके द्वारा बताई चंद बातों का सार ये निकलता है कि एक स्थिति  में आत्महत्या करने वाला व्यक्ति इसकी पूरी तैयारी कर चुका...
मधुलिका पटेल
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वह छत के कोने में धूप का टुकड़ा बहुत देर ठहरता है उसे पता हैअब मुझे काफी देर यहीं वक़्त गुज़ारना है क्योंकि वह शाम की ढलती धूप जो होती है उम्र के उस पड़ाव की तरह और मन डर कर ठहर जाता है ठंडी धूप की तरहजब अपने स्वयं के ल...
सुशील बाकलीवाल
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                          मेरी पत्नी ने कुछ दिनों पहले घर की छत पर कुछ गमले रखवा दिए और एक छोटा सा गार्डन बना लिया । पिछले दिनों मैं छत पर गया तो...
mahendra verma
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यादों के कुछ ताने-बाने और अकेलापन,यूँ ही बीत रहीं दिन-रातें और अकेलापन।ख़ुद से ख़ुद की बातें शायदख़त्म कभी न हों,कुछ कड़वी कुछ मीठी यादें और अकेलापन।जीवन डगर कठिन है कितनी समझ न पाया मैं,दिन पहाड़ खाई सी रातें और अकेलापन।किसने कहा अकेला हूँ मैंदेख ज़रा मुझको,घेरे र...
 पोस्ट लेवल : डगर अकेलापन जीवन
शिवम् मिश्रा
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प्रिये ब्लॉगर मित्रगण नमस्कार, पूजा ने कुछ दिनों पहले घर की छत पर कुछ गमले रखवा दिए और एक छोटा सा गार्डन बना लिया। पिछले दिनों मैं छत पर गया तो ये देख कर हैरान रह गया कि कई गमलों में फूल खिल गए हैं, नींबू के पौधे में दो नींबू भी लटके हुए हैं और दो चार हरी मिर्च भी...
विजय कुमार सप्पत्ति
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दोस्तों, आज पिताजी को गुजरे एक माह हो गए. इस एक माह में मुझे कभी भी नहीं लगा कि वो नहीं है. हर दिन बस ऐसे ही लगा कि वो गाँव में है और अभी मैं मिलकर आया हूँ और फिर से मिलने जाना है. कहीं भी उनकी कमी नहीं लगी. यहाँ तक कि संक्रांति की पूजा में भी ऐसा लगा कि वो है. बस...
Kailash Sharma
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घर नहीं होता बेज़ानदारछत से घिरी चार दीवारों का,घर के एक एक कोने में छुपा इतिहास जीवन का।खरोंचें संघर्ष कीजीवन के हर मोड़ की,सीलन दीवारों पर बहे हुए अश्क़ों की,यादें उन अपनों की जो रह गये बन केएक तस्वीर दीवार की,गूंजती खिलखिलाहट अब भी इस सूने घर मे...