ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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आत्महत्या एक ऐसा शब्द है जो सिवाय झकझोरने के और कोई भाव पैदा नहीं करता. यह महज एक शब्द नहीं बल्कि अनेकानेक उथल-पुथल भरी भावनाओं का, विचारों का समुच्चय है. यह शब्द मौत की सूचना देता है. किसी व्यक्ति के चले जाने की खबर देता है. सम्बंधित व्यक्ति के परिचितों के दुखी हो...
kumarendra singh sengar
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एक कार्यक्रम में एक विशेषज्ञ युवाओं और किशोरों से सम्बंधित समस्या पर प्रकाश डाल रहे थे. बातचीत के दौरान उन्होंने आत्महत्या के दो बिंदु बताये. उनके द्वारा बताई चंद बातों का सार ये निकलता है कि एक स्थिति  में आत्महत्या करने वाला व्यक्ति इसकी पूरी तैयारी कर चुका...
मधुलिका पटेल
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वह छत के कोने में धूप का टुकड़ा बहुत देर ठहरता है उसे पता हैअब मुझे काफी देर यहीं वक़्त गुज़ारना है क्योंकि वह शाम की ढलती धूप जो होती है उम्र के उस पड़ाव की तरह और मन डर कर ठहर जाता है ठंडी धूप की तरहजब अपने स्वयं के ल...
सुशील बाकलीवाल
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                          मेरी पत्नी ने कुछ दिनों पहले घर की छत पर कुछ गमले रखवा दिए और एक छोटा सा गार्डन बना लिया । पिछले दिनों मैं छत पर गया तो...
mahendra verma
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यादों के कुछ ताने-बाने और अकेलापन,यूँ ही बीत रहीं दिन-रातें और अकेलापन।ख़ुद से ख़ुद की बातें शायदख़त्म कभी न हों,कुछ कड़वी कुछ मीठी यादें और अकेलापन।जीवन डगर कठिन है कितनी समझ न पाया मैं,दिन पहाड़ खाई सी रातें और अकेलापन।किसने कहा अकेला हूँ मैंदेख ज़रा मुझको,घेरे र...
 पोस्ट लेवल : डगर अकेलापन जीवन
शिवम् मिश्रा
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प्रिये ब्लॉगर मित्रगण नमस्कार, पूजा ने कुछ दिनों पहले घर की छत पर कुछ गमले रखवा दिए और एक छोटा सा गार्डन बना लिया। पिछले दिनों मैं छत पर गया तो ये देख कर हैरान रह गया कि कई गमलों में फूल खिल गए हैं, नींबू के पौधे में दो नींबू भी लटके हुए हैं और दो चार हरी मिर्च भी...
विजय कुमार सप्पत्ति
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दोस्तों, आज पिताजी को गुजरे एक माह हो गए. इस एक माह में मुझे कभी भी नहीं लगा कि वो नहीं है. हर दिन बस ऐसे ही लगा कि वो गाँव में है और अभी मैं मिलकर आया हूँ और फिर से मिलने जाना है. कहीं भी उनकी कमी नहीं लगी. यहाँ तक कि संक्रांति की पूजा में भी ऐसा लगा कि वो है. बस...
Kailash Sharma
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घर नहीं होता बेज़ानदारछत से घिरी चार दीवारों का,घर के एक एक कोने में छुपा इतिहास जीवन का।खरोंचें संघर्ष कीजीवन के हर मोड़ की,सीलन दीवारों पर बहे हुए अश्क़ों की,यादें उन अपनों की जो रह गये बन केएक तस्वीर दीवार की,गूंजती खिलखिलाहट अब भी इस सूने घर मे...
Anju choudhary(anu)
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‘’ये अमीरों की जमात भी बड़ी अजीब सी होती हैं |इन लोगों की हर बात आम इन्सानों से अगल ही होती है|घर के रहन सहन, उनके कपड़े, उनके घर के झगड़े, जैसे हिन्दी सीरियल में दिखाये जाते हैं उनसे एक दम अलग .....यहाँ इन घरों में कोई ऊँची आवाज़ में बात नहीं करता |दो-चार गालियाँ इंग्...
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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अकेलापनभ्रम का दूसरा रूप हैअकेलेपन में स्वयं से बात करनायादों में खो जाना स्थितियों परिस्थितियों को तोलनाअकेलेपन को दूर करता भी हैअकेलेपन में धकेलता भी कोई नहीं चाहता अकेला रहे फिर भी कभी कभी अकेलापन भी चैन देता है भीड़ के साथ रहने से उत्पन्न कुंठा से मुक...
 पोस्ट लेवल : अकेलापन