ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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जलती देह नारी की विधाता,  क्रूर  निर्मम प्राणी  रचाया । क्रोध द्वेष दंभ हृदय में इसके, क्यों अगन तिक्त भार बढ़ाया ।सृजन नारी का सृजित किया है, ममत्त्व वसुधा पर लावन को।दुष्ट अधर्मी मानव जो पापी,आकुलता सिद्धी पावन को।भद्र भाव का करत...
अनीता सैनी
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अकेली औरतें अकेली कहाँ होती हैं,  घिरी होती हैं वे ज़िम्मेदारियों से, गिरती-उठती स्वयं ही सँजोती हैं आत्मबल,   भूल जाती हैं तीज-त्योहार पर संवरना। सूखे चेहरे पर पथरायी आँखों से, दे रही होती हैं वे अनगिनत प्रश्नों के उत्तर, वर्...
Sanjay  Grover
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इस फ़िल्म के बारे में आवश्यक जानकारियां आप इन दो लिंक्स् पर क्लिक करके देख सकते हैं -  1, IMDb  2. Wikipedia(विकीपीडिया पर इस फ़िल्म के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है)06-01-2016तारा अपने पति व अन्य परिवारियों के साथ गांव में शराब बनाती है। ख़ानदा...