ब्लॉगसेतु

Kailash Sharma
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ज़िंदगी कुछ नहीं कहा तूने,मौन रह कर सभी सहा तूने।रात भर अश्क़ थे रहे बहते,पाक दामन थमा दिया तूने।लगी अनजान पर रही अपनी,दर्द अपना नहीं कहा तूने।फूल देकर सदा चुने कांटे,ज़ख्म अपना छुपा लिया तूने।मौत मंज़िल सही जहां जाना,राह को पुरसुकूँ किया तूने।~~©कैलाश शर्मा 
Kailash Sharma
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काश तुमसे न मैं मिला होता,दर्द दिल में न ये पला होता।रौनकों की कमी न दुनिया में,एक टुकड़ा हमें मिला होता।आसमां में हज़ार तारे हैं,एक तारा मुझे मिला होता।तू न मेरे नसीब में गर था,इस जहाँ में न तू मिला होता।ज़िंदगी कट रही बिना तेरे,याद देकर न तू गया होता। नींद से ट...
Kailash Sharma
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ज़िंदगी कुछ ख़फ़ा सी लगती है,रोज़ देती सजा सी लगती है।रौनकें सुबह की हैं कुछ फीकी,शाम भी बेमज़ा सी लगती है।राह जिस पर चले थे हम अब तक,आज वह बेवफ़ा सी लगती है।संदली उस बदन की खुशबू भी,आज मुझको कज़ा सी लगती है।दर्द जो भी मिला है दुनिया में,यार तेरी रज़ा सी लगती है।...© कैलाश...
Kailash Sharma
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खून अपना सफ़ेद जब होता,दर्द दिल में असीम तब होता।दर्द अपने सदा दिया करते,गैर के पास वक़्त कब होता।रात गहरी सियाह जब होती,कोइ अपना क़रीब कब होता।चोट लगती ज़ुबान से ज़ब है, घाव गहरा किसे नज़र होता।बात को दफ्न आज रहने दो,ग़र कुरेदा तो दर्द फ़िर होता।बात कह जब पलट गया कोई...
Kailash Sharma
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अश्क़ जब आँख से ढला होगा,दर्द दिल का बयां हुआ होगा।एक तस्वीर उभर आई थी,ये पता कब धुंआ धुंआ होगा।बात लब पर थमी रही होगी,नज्र ने कुछ नहीं कहा होगा।आज तक दंश गढ़ रहा यह है,बेवफ़ा समझ के गया होगा।चाँद का दर्द कौन समझा है,सुब्ह चुपचाप घर गया होगा।न कुछ हमने कहा न था तूने,द...
Kailash Sharma
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ज़ब ज़ब शाम ढली,हर पल आस पली।ज़ीवन बस उतना,जब तक सांस चली।दिन गुज़रा सूना,तनहा शाम ढली।खुशियाँ कब ठहरी,कल पर बात टली।सूनी राह दिखी,मन में पीर पली।अपना कौन यहाँ,झूठी आस पली।मंज़िल दूर नहीं,सांसें टूट चली।...©कैलाश शर्मा
Kailash Sharma
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शाम भी शाम सी नही गुज़री,रात भी याद में नही गुज़री।आज भी हम खड़े रहे दर पर,तू मगर राह से नही गुज़री।कौन किसका हबीब हो पाया,ज़िंदगी है रक़ीब सी गुज़री।दर्द ने राह क्यूँ वही पकड़ी,राह जिस पर ख़ुशी रही ठहरी।तू न मेरी नज़र समझ पाया,बात इतनी भी थी नही गहरी।...©कैलाश शर्मा
Kailash Sharma
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एक दिन तो मिलें,कुछ क़दम तो चलें।राह कब एक हैं,मोड़ तक तो चलें।साथ जितना मिले,कुछ न सपने पलें।राह कितनी कठिन,अश्क़ पर क्यूँ ढलें।भूल सब ही गिले,आज़ फ़िर से मिलें।...©कैलाश शर्मा 
Kailash Sharma
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इश्क़ को ज़ब से बहाने आ गए,दर्द भी अब आज़माने आ गए।दर्द की रफ़्तार कुछ धीमी हुई,और भी गम आज़माने आ गए।कौन कहता है अकेला हूँ यहाँ,याद भी हैं साथ देने आ गए।रात भर थे साथ में आंसू मिरे,सामने तेरे छुपाने आ गए।हाथ में जब हाथ था आने लगा,बीच में फिर से ज़माने आ गए।  &...
Kailash Sharma
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आज ये दिन उदास सा गुज़रा,एक साया इधर से था गुज़रा।यूँ तो यह शाम वक़्त से आयी,क्यूँ है लगता कि दिन नहीं गुज़रा।रात भर सिल रहा था गम अपने,उनको पाया था फ़िर सुबह उधरा।चांदनी खो गयी थी आँखों की,चांद भी आज ग़मज़दा गुज़रा।उम्र भर का हिसाब दूँ कैसे, एक पल उम्र से लंबा गुज़रा।...