ब्लॉगसेतु

PRABHAT KUMAR
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एक अजनबी शहर जहां तुम मिलेया यूं कहें कि हम मिलेहमसे ज्यादा ख़ूबसूरत रातें भी हुईं दिन रात ख्वाब बनकर जो चल रहे थेअब ख्वाबों के बाद सुबह हो गईवो रास्ते जो हमें देख रहे थेआज पूछते हैं कि हम कहां गए।टूटती चरमराती लकड़ियों की तरहयादों का बार बार स्मरण हो जानाजैसे महुए क...
मधुलिका पटेल
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मीलों दूर तक पसरे हुए ये रास्तेकभी कभी बोझिल हो जाते हैं कदम जाने पहचाने रास्तों को देर नहीं लगती अजनबी बनने में जब सफर होता है तन्हाऔर मंज़िलें होती गुमरौशनी में नहाये हुए बाज़ार रौनकों से सजी हुई दुकाने पर मैं कुछ अलहदा ढूंढ़ रही हूँ खर...
मधुलिका पटेल
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यह जीवन जब भीड़ में गुम हो जाने के बाद धीरे - धीरे तन्हा होता है धीरे - धीरे पंखुड़ियों से सूख कर बिखर जाते हैं यह रिश्ते प्यार स्नेह और अपनेपन की टूट जाती है माला धीरे - धीरे हर मन का गिरता जाता है धीरे - धीरे कम हो जाता...
पम्मी सिंह
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पम्मी सिंह
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 न जाने क्यूँ पेश आती..कभी हमें भी यकीन था..,पर कभी-कभीजिंदगी न जाने क्यूँ पेश आती हैअजनबियों की तरहइन आँखों में बसी  ख्वाबों के, मंजर अभी बाकी हैपीछे रह गए तमाम हसरतों के, अन्जामअभी बाकी हैवो क़हक़हा जो ठिठकी हैं दरख्तों पर,उनके खिलने क...
सरिता  भाटिया
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आओ फिर से अजनबी बन जायें हम दोनों दो अजनबी दोस्त fb के एक तुम जैसा... एक मुझ जैसा...फिर से जाने कुछ अनछुये पहलु कुछ मेरे तुम...कुछ तेरे मैं...बाँटे सुख दुःख को मिलकर कुछ मेरे तुम...कुछ तेरे मैं... बन जायें हर बात में सलाहकार कुछ मेरे त...
 पोस्ट लेवल : दोस्त अजनबी
मधुलिका पटेल
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मै कौन हूँ और क्या हूँक्या तुम मुझे हो जानतेबस चंद है मेरी ज़रूरतें किताब की दुकान देख रुक जाती हूँ अच्छे और सुंदर सफे लिए बिना रह नहीं पाती हूँसुंदर कलम तलाशती आँखेंसांसारिक रंग ढ़ंग कुछ नहीं आता बस कुछ लिख़ने के लिए एकांत मुझे है भाता सुकून मि...
नई कलम
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आप सब को ईद की दिली मुबारकबाद ! साथ में ईदी के तौर पे पिछले दिनों लिखा हुआ आपके हाथों में सौंप रहा हूँ. इसी मोड़ पे लहराता हाथ छोड़ आया था हाथ क्या, यूं समझो ज़िन्दगी का साथ छोड़ आया था शकले आसुओं में मुहब्बत की विरासत दे गयी वरना कब का मैं वो शहर छोड़ आया था अहदे वफ़ा...
 पोस्ट लेवल : शाहिद 'अजनबी'
नई कलम
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माँ मेरी बहुत प्यारी है मुझे डांटती है, मुझे मारती है फिर मुझे खींच के सीने से लिपटा लेती है माँ मेरी बहुत प्यारी है चौका बासन भी करती  है घर का सारा काम वो करती है ग़म मेरे होते हैं ,और उठा वो लेती है माँ मेरी बहुत प्यारी है देर रात मैं खाने को कुछ कह दूं मेर...
 पोस्ट लेवल : शाहिद 'अजनबी'
सुनीता शानू
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एक अजनबी अपना सा क्यूँ लगने लगा,क्यूँ कोई दिल में आज मेरे धड़कने लगा…किससे मिलने को बेचैन है चाँदनी,क्यूँ मदहोश है दिल की ये रागिनी,बनके बादल वफ़ा का बरसने लगाएक अजनबी अपना सा क्यूँ लगने लगागुम हूँ मै गुमशुदा की तलाश मेंखो गया दिल धड़कनो की आवाज़ मेंये कौन सांस बनके दि...
 पोस्ट लेवल : एक अजनबी