ब्लॉगसेतु

राजीव तनेजा
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क़ुदरती तौर पर कुछ चीज़ें..कुछ बातें...कुछ रिश्ते केवल और केवल ऊपरवाले की मर्ज़ी से ही संतुलित एवं नियंत्रित होते हैं। उनमें चाह कर भी अपनी मर्ज़ी से हम कुछ भी फेरबदल नहीं कर सकते जैसे...जन्म के साथ ही किसी भी परिवार के सभी सदस्यों के बीच, आपस का रिश्ता। हम चाह कर भी अ...
सलिल  वर्मा
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 ‘बातों वाली गली” का कर्ज़ चुकाने का मौक़ा “अटकन चटकन” ने दे दिया, हालाँकि इसमें भी व्यक्तिगत व्यस्तताओं और परेशानियों के कारण महीने भर से ज़्यादा का समय निकल गया। यह उपन्यास लिखा है श्रीमती वंदना अवस्थी दुबे ने और इसके प्रकाशक हैं शिवना प्रकाशन। कुल जमा 88 पृष्ठ...
वंदना अवस्थी दुबे
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"लोहे का घर " फेम  Devendra Kumar Pandey जी मेरे ब्लॉगर साथी हैं। फेसबुक पर भी एक बात देवेंद्र भैया और मेरी कॉमन है, वो ये कि हम दोनों ही रेल यात्राएं लिखने के शौक़ीन हैं। देवेंद्र जी ने इतना कुछ लिख दिया अटकन चटकन के बारे में, कि मन प्रसन्न हो गया। आप...
वंदना अवस्थी दुबे
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अपनी किताब की प्रशंसा , अपनी ही वॉल पर, खुद के द्वारा पोस्ट करने में सकुचाहट तो होती है, लेकिन फिर आप सब तक वो रिव्यू कैसे पहुंचे, जो केवल मुझे मिला हो? फिर किताब का पहला रिव्यू एक अलग ही महत्व रखता है। Shaily Ojha मेरी भांजी है, मोटिवेशनल स्पीकर है और सका...