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संजीव तिवारी
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-    विनोद सावहिन्दी साहित्य के भारतेंदु युग के उद्भट रचनाकार प्रतापनारायण मिश्र ने एक पत्रिका का प्रकाशन आरम्भ किया था उसका नाम रखा था ‘ब्राम्हण’. यह एक सामाजिक-साहित्यिक पत्रिका. बस इसी तरह से दुर्ग और उसके पडोसी नगर भिलाई में कारखाने की स्थापना के बाद...
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संजीव तिवारी
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संयोगवश बाॅलीवुड के गुरूदत्त और संजीव कुमार का जन्मदिन की एक ही तारीख है 9 जुलाई। दोनों अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृृष्ट कलाकार थे। संजीव कुमार का संवाद शैली, अभिनय, मुस्कुराहट दर्शकों के दिल में हमेशा रहेंगे और ये भी सच है कि गुरूदत्त के जाने के बाद कई फिल्मों के न...
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संजीव तिवारी
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खुमान साव किसी व्यक्ति का नही वस्तुतः छत्तीसगढ़ी संगीत का नाम है। खुमान साव छत्तीसगढ़ी संगीत की आत्मा भी है और देह भी। खुमान साव के संगीत के पहले हम इस अंचल के खेत-खलिहानों, तीज-त्यौहारों, उत्सव और अन्यान्घ्य अवसरों पर जो सुनते थे, वे सर्वथा पारंपरिक थे और रचनात्मक स...
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संजीव तिवारी
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पिछले दिनों फेसबुक पर स्व. खुमान साव जी की यादों को एक चित्र के माध्यम से संजोकर पोस्ट किया था जिसे लोक-संगीत के प्रेमियों ने काफी सराहा. उसी पोस्ट को और विस्तृत करने का प्रयास है यह लेख. पहले राजघाट वाली उसी पोस्ट को यहाँ उदधृत कर रहा हूँ. राजघाट {बापू की समाधि) द...
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- विनोद सावसावन माह का यह पहला दिन था. थोड़ी फुहार थी इसलिए हवा ठंडी बह रही थी. पाटन का यह इलाका चिरपरिचित इलाका था. गांव कस्बों में गौरवपथ बन गए है. इस इलाके के सेनानियों ने स्वाधीनता संग्राम में लड़ाइयां लड़ी थीं. गौरवपथ जिस चौराहे से शुरू होता है वह आत्मानंद चौक कह...
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- विनोद सावआधुनिक काल में हिन्दी निबंधों के विकास का पहला युग भारतेंदु युग कहलाया और दूसरा युग द्विवेदी युग. तीसरा युग शुक्ल युग. इस तीसरे युग में रामचंद शुक्ल के साथ बाबू गुलाबराय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, जयशंकर प्रसाद आदि हुए थे. बक्शी जी का नाम पदुमलाल...
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- विनोद सावछत्तीसगढ़ प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन रायपुर में आयोजित 'हिन्दी और रोजगार' विचार सत्र की अध्यक्षता डॉ. इंदिरा मिश्र IAS ने की. एन.आई.टी. के प्रो.समीर वाजपेयी ने आलेख पढ़ा। अपने विचार रखते हुए लेखक विनोद साव. कार्यक्रम संचालन संजय शाम ने किया.मुक्त...
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17 एवं 18 फरवरी 2018 को आयोजित कार्यक्रम की रिर्पोटिंगदूध मोंगरा छत्तीसगढ़ी सांस्कृति समिति, गंडई, जिला राजनांदगांव छग. द्वारा दिनांक 17 एवं 18 फरवरी 2018 को शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय शंकर नगर, रायपुर के सभागार में राज्य स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष...
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ज्ञान-प्रवाह, वाराणसी के तत्त्वावधान में मैं डा० नीलकण्ठ पुरुषोत्तम जोशी (पूर्व निदेशक मथुरा तथा लखनऊ संग्रहालय) के साथ मिलकर एक शोध परियोजना ''शिल्प-सहस्रदल : डायरेक्टरी आफ यूनीक, रेयर ऐण्ड अनकामन ब्रह्मैनिकल स्कल्पचर्स'' पर विगत 2004-2005 से कार्य कर रहा हूं । त्...
संजीव तिवारी
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एक औरत और एक मां या यो कहे कि एक मां को केवल एक औरत बना लेने की बेटे की इच्छा कैसे मां को तोड़ देती है, अपने जीवन से एकदम विमुख कर देती है इसका अत्यत प्रभावपूर्ण चित्रण बहादुर कलारिन मे फिदाबाई ने किया।"चरनदास चोर' के बाद हबीब तनवीर ने फिर एक लोककथा उठाई 'बहादुर कल...