ब्लॉगसेतु

Lokendra Singh
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अमरकंटक दर्शन - 9पृथ्वी पर भगवान शिव का धाम (निवास) कहाँ है? यदि यह प्रश्न आपके सामने आएगा तो अधिक संभावना है कि आप क्षणभर गंवाए बिना उत्तर देंगे- ‘और कहाँ, कैलाश।’ अपने उत्तर में दूसरा स्थान आप ‘काशी’ भी जोड़ सकते हैं। किंतु, ‘अमरकंटक’ शायद ही आपके ध्यान में आए। ज...
Lokendra Singh
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अमरकंटक दर्शन - 8किसी भी स्थान के नामकरण के पीछे कोई न कोई कहानी होती है। धार्मिक पर्यटन स्थल पर यह नियम विशेष रूप से लागू होता है। अमरकंटक के ‘धूनी-पानी’ की कहानी भी बड़ी रोचक है। स्वाभाविक ही किसी स्थान के नाम में ‘धूनी’ से आभास होता है कि यह कोई ऐसा स्थल है जहाँ...
Saransh Sagar
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गोस्वामी तुलसीदास कृतसंकटमोचन हनुमानाष्टकबाल समय रबि भक्षि लियो तब, तीनहुँ लोक भयो अँधियारो ।ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो ॥देवन आन करि बिनती तब, छाँड़ि दियो रबि कष्ट निवारो ।को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 1 ॥बालि की त्रास...
Lokendra Singh
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अमरकंटक दर्शन - 7अमरकंटक के जंगल में, ऊंचे पहाड़ पर एक चट्टान ऐसी है, जिसमें 12 महीने पानी रहता है। चट्टान में एक छेद है, उसमें हाथ डाल कर अंजुली भर जल निकाल सकते हैं। इस आश्चर्यजनक चट्टान को भृगु का कमंडल कहा जाता है। मेरे मित्र अशोक मरावी और मुकेश ने जब मुझे यह ब...
Saransh Sagar
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 अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुतेगिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते...
Saransh Sagar
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एक साधु वर्षा के जल में प्रेम और मस्ती से भरा चला जा रहा था कि इस साधु ने एक मिठाई की दुकान को देखा जहां एक कढ़ाई में गरम दूध उबला जा रहा था, तो मौसम के हिसाब से दूसरी कढ़ाई में गरमा गरम जलेबियां तैयार हो रही थी।साधु कुछ क्षणों के लिए वहाँ रुक गया। शायद भूख का एहसा...
Lokendra Singh
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अमरकंटकदर्शन - 6अमरकंटक की पहली पहचान माँ नर्मदा नदी के उद्गम और वन्यप्रदेश के रूप में है। लेकिन, यह सामाजिक आंदोलन के प्रख्यात संत कबीर महाराज की तपस्थली भी है। अमरकंटक में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित कबीर चबूतरा वह स्थान है, जहाँ कबीर की उपस्थिति को...
Saransh Sagar
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हिंदू विवाहित महिलाएं जिनके पति जीवित हैं, अपने सास-ससुर एवं पति की लम्बी उम्र के लिए वट सावित्री व्रत को मानतीं हैं। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिणी भारतीय राज्यों में विवाहित महिलाएं उत्तर भारतीयों की तुलना में 15 दिन बाद समान रीति से वट सावित्री व्रत मानतीं हैं।सा...
Saransh Sagar
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ईश्वर सद्गुणों के संग्रह है ! संग्रह को अपनाया ही नही तो ईश्वर खुश नही होने वाले !! न घंटा बजाने से न कीर्तन करने से और न ही शंख बजाने से ! ये सब निजी संतुष्टि के उदाहरण मात्र है जिनसे एक निश्चित समय के लिये मानसिक और शारीरिक लाभ जरूर मिलता है पर जीवन को सन्मार्ग औ...
Saransh Sagar
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सरस्वती वंदना -  हे शारदे माँ , हे शारदे माँहे शारदे माँ, हे शारदे माँ,अज्ञानता से हमें तार दे माँतू स्वर की देवी ये संगीत तुझ से,हर शब्द तेरा है हर गीत तुझ से,हम है अकेले, हम है अधूरे,तेरी शरण हम हमें प्यार दे माँहे शारदे माँ, हे शारदे माँ...अज्ञानता...