ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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लिबास जो पहना था साल भर,उम्र ने अब उतार कर रख दिया,और साथ में उतार दिए,वो गिनती के दिन, जो मुझे दिए थे,कह कर के ये तेरा हिस्सा है,इनको जिस मर्ज़ी खर्च कर।बचा तो ना पाया मैं एक दिन भी,पर जाने कहाँ उनको दे आया हूँ।खुशियाँ तो नहीं खरीदी मैंने उनसे,ना ही किसी के दुख बा...
 पोस्ट लेवल : गौरव धूत अनहद कृति से
Yashoda Agrawal
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-१-बैठा रहताबहती धारा...जिसको कविता कहतादूर न पासअंदर न बाहरअपने आप में पूर्ण..चलना कितनादूर उसको ले आतादरवाज़े के उस पारआसमान नीलम-सामौन..कविता गाता...।-२-प्रेम-कहानीपढ़ने मेंमुझें डर लगता...क्योंकिचमकते हुये तारोंऔर-टूट के गिरते तारों मेंफरक समझता हूँ...।-३-प्रेम....
Yashoda Agrawal
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तुम्हारे बिना आरती का दिया यह,न बुझ पा रहा है, न जल पा रहा है।भटकती निशा कह रही है कि तम में दिये से किरन फूटना ही उचित है,शलभ चीखता पर बिना प्यार के तो विधुर सांस का टूटना ही उचित है,इसी दर्द में रात का यह मुसाफ़िर, न रुक पा रहा है, न चल पा रहा है।त...
Yashoda Agrawal
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पागलपन की हद तक सपनों को चाहना।कुछ नया कर दिखा, दिल यह कह रहा।क्षितिज तक उड़ान है भरना,सपनों को साकार है करना।चाहत ऊँची उड़ान की,मुश्किल डगर है आसाँ नहीं।मेहनत से नहीं है डरना,ख़्वाब को पूरा है करना।हौसला बुलन्द कर,गिरने से नहीं है डर।उठना है थकना नहीं,उड़ान को क्षितिज...
Yashoda Agrawal
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कुछ तो पाया है मिरे दिल ने तेरे जाने में।रात भर रोए थे, कुछ मोतियों को पाने में।।फिर न कहना कि मुझे दोस्तों का मोल नहीं,उम्र  गुज़री  है,  तेरी  दोस्ती  भुलाने  में।।तुमने पूछा ही नहीं मुझसे मेरा हाल-ए-जिगर,मैं  बताने  तो गया...
Yashoda Agrawal
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१-बैठा रहताबहती धारा...जिसको कविता कहतादूर न पासअंदर न बाहरअपने आप में पूर्ण..चलना कितनादूर उसको ले आतादरवाज़े के उस पारआसमान नीलम-सामौन..कविता गाता...।२-प्रेम-कहानीपढ़ने मेंमुझें डर लगता...क्योंकिचमकते हुये तारोंऔर-टूट के गिरते तारों मेंफरक समझता हूँ...।३-प्रेम...क...
Yashoda Agrawal
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घिर के आयीं घटायें सावन बरसे हैं,नैना तेरे दीद को फिर से तरसे हैं !घिर के आयीं घटायें सावन बरसे हैं......मन को कैसी लगन ये लगी हैकैसे प्यास जिया में जागी है,कैसे हो गया मन अनुरागी है, कैसे हो के बेचैन अब रहते हैं !घिर के आयीं घटायें सावन बरसे हैं........अजब ग़ज़...
Yashoda Agrawal
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बिना किसी पूर्व-सूचना के एक दिन आ गया प्रलय, भौंचक्के रह गए सारे भविष्यवेत्ता,सन्न रह गया समूचा मौसम-विभाग, हहराता समुद्र लील गया सारा आकाश,सूर्य डूब गया उसमें, जिसकी फूली हुई लाश बहती मिली दूर कहीं कुछ समय बाद चाँद और सितारे,&nbs...
Yashoda Agrawal
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गीत धड़कन से निकल कर्कश हुये टकरा ग़मों से, आग की बरसात हुई। बदक़िस्मत! ख़ुदा तक पहुंच कर, लौटी अधूरी मांगलो! दिल की हमारी;स्वाद में ऐसा लगा,  चाश्नी में किस तरह  नीम कड़ुवे की शुमारी। ठोक माथा-मुँह छिपा रोये,&...
 पोस्ट लेवल : अनहद कृति से हरिहर झा
Yashoda Agrawal
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तुमने लिखा था;उस रातखींचकर मेरा हाथ,बना उंगली कलम से प्यार नाम तुमने!फ़ासला था हममें;उस रात,चारों ओर नीरवताबेसुध सो रही थी।तारिकाएँ ही जानतीदशा मेरे दिल की उस रात।मैं तुम्हारे पास होकर दूर तुमसे जा रही थी।अधजगा-सा, अलसाया-अधसोया हुआ-सा मन,उस रात।तुमन...