ब्लॉगसेतु

girish billore
223
..............................
 पोस्ट लेवल : love अनुभूति .प्रेम love-poetry
Yashoda Agrawal
3
मन बगिया सुख दुख के पुष्प साथ खिलते -*-खिला गुलाब कांटों बीच मुस्काता जीना सिखाता -*-जीवन रीत तप के ही मिलते सोने से दिन ..!!!-*-आशा की डोरी हौंसलों के मनके पिरोई जीत -*-बेटी की हँसी महके अंगनारा फूलो...
 पोस्ट लेवल : हाईकू अनुभूति आभा खरे
ANITA LAGURI (ANU)
424
वो पगली,,,🍂🍁🍀अक्सर गली के चौराहे पर.....!वो घूरती &#234...
Yashoda Agrawal
3
मेरी साँसों पर मेघ उतरने लगे हैं,आकाश पलकों पर झुक आया है,क्षितिज मेरी भुजाओं में टकराता है,आज रात वर्षा होगी।कहाँ हो तुम?मैंने शीशे का एक बहुत बड़ा एक्वेरियमबादलों के ऊपर आकाश में बनाया है,जिसमें रंग-बिरंगी असंख्य मछलियाँ डाल दी हैं,सारा सागर भर दिया है।आज रात वह...
Yashoda Agrawal
3
गोली खाकरएक के मुँह से निकला-'राम'।दूसरे के मुँह से निकला-'माओ'।लेकिनतीसरे के मुँह से निकला-'आलू'।पोस्टमार्टम की रिपोर्ट हैकि पहले दो के पेटभरे हुए थे।-सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
Yashoda Agrawal
3
मुट्ठी भर सपनेदो चार अपने  ख़ुशी के चार पलतुम्हारी याद नहीं, तुमबस.…जिंदगी सेइतना ही तो माँगा थाक्या ये बहुत ज्यादा था !!!-:-दुःख मेंरोने को एक कांधासुख में ... झूलने को दो बाहेंवारी जाने कोएक प्यारी सी मुस्कानसपने समेटने को  जीवन से भरी दो आँखेंबस.…जिंदग...
मुकेश कुमार
208
स्त्री हूँहाँ स्त्री ही हूँकोई अजूबा नहीं हूँ, समझे न !क्या हुआ, मेरी मर्जीजब चाहूँ गिराऊं बिजलियाँया फिर हो जाऊं मौनमेरी जिंदगीमेरी अपनी, स्वयं कीजैसे मेरा खुद का तराशा हुआपांच भुजिय प्रिज्मकौन सा रंग, कौन सा प्रकाशकिस प्रवर्तन और किस अपवर्तन के साथकिस किस वेव लें...
Kailash Sharma
460
तलाशते राह आध्यात्मिक विकास की पर्वतों की कंदराओं में नदियों के किनारे गुरु के सामीप्य में,नहीं कभी झांकते अपने अंतर्मन में,नहीं करते प्रारंभ यात्रा अपने अन्दर से.होती यात्रा प्रारंभ जब अन्दर से बाहर,होते समर्थ खोजने में सार स्व-अस्तित्व का.अंतस का प्रकाश देता एक न...
Shachinder Arya
154
अँधेरा जल्दी होने लगा है। ठंड इतनी नहीं है। धीरे-धीरे बहुत सी तरहों से सोचने लगा हूँ। कई बातें लगातार चलती रहती हैं। पीछे लगतार अपने लिखने पर सोचता रहा। एक बार, दो बार, तीन बार । पर कहीं भी पहुँच न सका। ख़ुद की बुनावट में कई चीज़ें इस तरह गुंफित हैं कि वह इतना आसान ल...
विजय कुमार सप्पत्ति
471
मेरे प्रिय आत्मीय मित्रो , नमस्कार आपका जीवन शुभ हो इसी मंगलकामना के साथ मैं एक बात कहना चाहता हूँ . हमारे शरीर की एक मात्र सम्पूर्ण अभिव्यक्ति सिर्फ हमारी जीभ ही है . और प्रभु ने इसे लचीला बनाया है ताकि हम सुगमता से इसका उपयोग कर सके . लेकिन अक...