ब्लॉगसेतु

Shachinder Arya
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अँधेरा जल्दी होने लगा है। ठंड इतनी नहीं है। धीरे-धीरे बहुत सी तरहों से सोचने लगा हूँ। कई बातें लगातार चलती रहती हैं। पीछे लगतार अपने लिखने पर सोचता रहा। एक बार, दो बार, तीन बार । पर कहीं भी पहुँच न सका। ख़ुद की बुनावट में कई चीज़ें इस तरह गुंफित हैं कि वह इतना आसान ल...
Shachinder Arya
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ऐसा नहीं है के इन बिन लिखे दिनों में मन नहीं किया। साल ख़त्म होते-होते कई सारी बातें हैं जिन्हे कहने का मन है। मन है उन अधूरी पोस्टों पर काम करने का। पीछे किए वादों पर लौट जाने का। कतरनों को जोड़ पूरे दिन बनाने का। इत्मीनान से रुककर सबकुछ कह लेना चाहता हूँ। जो पास है...
Shachinder Arya
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जैसे अभी लिखने वाला हूँ कि मुझे नहीं पता के ‘रक़ीब’ का मतलब क्या है। पहली बार सुना। इतनी पास से। सोच रहा था इसके बाद रुक क्यों गया। लाया तो था के बहुत कुछ है, जो कह दूंगा। पर ठहर क्यों गया? कभी-कभी कुछ देर पहले तक मन होता है। फ़िर अचानक वहाँ से हट कहीं और चल जाता है।...
Shachinder Arya
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जीशान। उसका नाम जीशान है। कभी नाम का मतलब नहीं पूछा। शायद उसे मालुम भी न हो। क्लास में पढ़ने वाले और भी बच्चे हैं पर पता नहीं क्यों इस पर आकर ठहर जाता हूँ। शक्ल से बिलकुल मासूम सा। पढ़ने से जी न चुराने वाला। रोज़ स्कूल आता। पर सितम्बर के बाद इसका आना एकदम से कम हो गया...
Shachinder Arya
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जबसे पिछली पोस्ट लिखी है नींद गायब है। उसका ऐसे गायब हो जाना समझ नहीं आ रहा। कहाँ चली गयी। पता नहीं। वह पास नहीं है। ये पता है। रात करीब साढ़े दस हो रहे होंगे जब लैपटॉप बंद किया। ऊपर आया। सीढ़ियों पर अँधेरा था। रोज़ की तरह। उन पर चप्पलों की आवाज़ आ रही थीं। रोज़ की तरह।...