ब्लॉगसेतु

jaikrishnarai tushar
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चित्र -साभार गूगल एक प्रेम गीत -जिसे देखा चाँद था या ----मन्दिरों की सीढ़ियों पर आ रहा है याद कोई |जिसे देखा चाँद था या चाँद का अनुवाद कोई |आरती के दिये  जैसी एक जोगन सांध्य बेला ,खिलखिलाते फूल के वन और इक भौरा...
Rajeev Upadhyay
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मैं लिख नहीं पाऊँगाभव्य भूमिका मेरे गीत के प्रस्तावाना के रूप में।एक कवि सेकविता की यात्राके बीच ही है साहस कुछ कहने का।फूलों से गिर हुएइन पँखुड़ियों में से हीलगता है उचित एक कोई।प्रेम अनुगूँजित होता रहेगा उसी सेजब तक पँखुड़ी वो बालों में तुम्हारे&nbsp...
Rajeev Upadhyay
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मुझको भी तरकीब सिखा कोई यार जुलाहे अक्सर तुझको देखा है कि ताना बुनते जब कोई तागा टूट गया या ख़तम हुआ फिर से बाँध के और सिरा कोई जोड़ के उसमें आगे बुनने लगते हो तेरे इस ताने में लेकिन इक भी गाँठ गिरह बुनकर कीदेख नहीं सकता है कोई&nb...
Rajeev Upadhyay
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क्योंकिमैं रुक ना सकीमृत्यु के लिएदयालुता से मगरइन्तजार उसने मेरा कियाऔर रूकी जब तो हम और अमरत्वबस रह गए।धीरे-धीरे बढ़ चले सफर पर हम जल्दबाजी नहीं उसे। सब कुछ छोड़ दिया मैंने अपनी मेहनत और आराम भी। शिष्टता उसकी ऐसी थी!हम स्कूल से होकर गु...
Vijay Prabhakar Nagarkar
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संत ज्ञानेश्रर जी ने ज्ञानेश्वरी ग्रंथ अर्थात "सटीक भावार्थ दीपिका"  पूर्ण करने के उपरांत ईश्वर को जो प्रार्थना लिखी थी,उसे 'पसायदान' से मराठी विश्व में ख्याति प्राप्त हुई है। अत्यंत कष्टदायी जीवन बिताने पर गीता ग्रंथ पर सटीक विवरण प्राकृत मराठी में लिखा। संन्...
 पोस्ट लेवल : #अनुवाद #Translation #कविता
Vijay Prabhakar Nagarkar
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(समाज सुधारक और देश में नारी को शिक्षा देने के लिए पहला  स्कूल पुणे में खोलने वाले ज्योतिबा फुले पर लिखी गयी मराठी कविता का हिंदी अनुवाद)  ----ज्योतिबाधन्यवाद।आप  उसेदहलीज केबाहर ले आये,क ख ग घत थ द धपढ़ायाऔरकितना बदलाव आया है ,अब उसेदस्तख़त के लिएबायी...
 पोस्ट लेवल : #अनुवाद #Translation #कविता
Vijay Prabhakar Nagarkar
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अब इस गांधी का क्या करें ?
 पोस्ट लेवल : #अनुवाद #Translation #कविता
Vijay Prabhakar Nagarkar
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 मराठी कविता "आई"माँ एक नाम हैअपने आप भरा पूरा घर में जैसे एक गाँव है,सभी में मौजूद रहती हैअब इस दुनिया से दूर हैलेकिन कोई मानता नहीं।मेला खत्म हुआ, दुकानें उठ गईपरदेस में क्यों आंखे नम हुई,माँ हर दिल में कुछ यादें छोड़ जाती हैहर दिल जानता है माँ का दिल,घर...
 पोस्ट लेवल : #अनुवाद #कविता #Translation
Ashok Kumar
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पिछली सदी के आरम्भ में अमेरिका में के समृद्ध व्यापारिक घर जन्मीं ऐनी सैक्सटन, एक असाधारण कवयित्री हैं। उनकी कविताओं को  confessional verse, स्टाइल की कविता कहा गया जिसमें उनके निजी और सामजिक  जीवन की त्रासदी साफ़ तौर पर दिखाई देती है. हालाँकि उनकी कविताएँ...
Rajeev Upadhyay
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आह! नहीं चाहती हो तुमकि डरी हुई हो ग़रीबी से तुम;घिसे जूतों में नहीं जाना चाहती हो बाज़ार तुमऔर नहीं चाहती हो लौटना उसी पुराने कपड़े में। मेरी प्रेयसी! पसन्द नहीं है हमें,कि दिखें हमें उस हाल में, है जो पसंद कुबेरों को;तंगहाली हमारी। उखाड़ फेंकेंगे इस...