ब्लॉगसेतु

Sanjay  Grover
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(पिछला हिस्सा)आप चीज़ों को जब दूसरी या नई दृष्टि से देखते हैं तो कई बार पूरे के पूरे अर्थ बदले दिखाई देते हैं। बारात जब लड़कीवालों के द्वार पर पहुंचती थी तभी मुझे एक उदासी या अपराधबोध महसूस होने लगता था। गुलाबी पगड़ियों में पीले चेहरे लिए बारात के स्वागत लिए तैयार लोग...
kumarendra singh sengar
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ये फोटो अपने आपमें बहुत कुछ कहती हैं. जितने समय तक नगर पालिका चुनाव चले, उतने समय अनिल बहुगुणा जी भाजपा के बागी प्रत्याशी के रूप में मैदान में रहे. इस दौरान भी उनके और उनके समर्थकों द्वारा बराबर ये प्रचारित किया जाता रहा कि भाजपा उनके डीएनए में शामिल है. उनकी खुली...
Bhavna  Pathak
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 क्लास का अपने हूं मानीटरडरते मुझसे सारे चीटरहल्ला गुल्ला कर ना पाएंधमा चौकड़ी से कतराएंझगडां करते जिन्हें मैं पाऊंपनिशमेंट उनको दिलवाऊंक्लास में रखती हूं अनुशासननियमों का करवाती पालनमदद साथियों की करती हूंजो ना आए बतलाती हूंटीचर मुझसे खुश रहती हैंहैलो  म...
kumarendra singh sengar
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हँसते-खेलते-कूदते कब हाईस्कूल पास कर लिया पता ही नहीं चला. बोर्ड परीक्षाओं का हौवा भी हम मित्रों को डरा न सका था. हाईस्कूल की परीक्षाओं की समाप्ति को हँसते-खेलते-कूदते इसलिए कहा क्योंकि किसी भी विषय की परीक्षा समाप्त होते ही तय हो जाता था कि कितनी देर के खेल के मैद...
Madabhushi Rangraj  Iyengar
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वाह रे तकदीर !!!. (वाह रे तकदीर !!!) मु हल्ले में एक स्वामीजी का परिवार होता था. वे नाम के स्वामीजी थे, न कि धर्मावलंबी गेरुआ पहनने वाले. पूरा परिवार व मुहल्ला उन्हें पापा के नाम से जानता - पुकारता था. परिवार भरा पूरा सर्व संपन्न था. किसी भ...
Vivek Rastogi
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    आमतौर पर शेविंग करना भी एक शगल होता है, कोई रोज शेविंग करता है और कोई एक दिन छोड़कर, कुछ लोग मंगलवार, गुरूवार और शनिवार को शेविंग नहीं करते हैं । शेविंग करने से चेहरा अच्छा लगने लगता है और अपना आत्मविश्वास भी चरम पर होता है। केवल शेविंग करने से...
Vivek Rastogi
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सीन 1 – सब्जीमंडी में    सुबह का सुहाना दिन शुरू ही हुआ था, और हम सब्जी लेने पहँच गये सब्जीमंडी, वहाँ जाकर सुबह सुबह हरी हरी ताजी सब्जियाँ देखकर मन प्रसन्न हो गया, सब्जी वाले बोरों में से सब्जियाँ निकाल रहे थे, और साथ ही उनकी फालतू की बची हुई डंडिया...
Vivek Rastogi
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    गाँधीजी का सपना था कि हमारा भारत स्वच्छ हो, पर शायद ऐसे नहीं जैसे कि आज सरकारी मशीनरी ने किया है। कि पहले राजनेताओं की सफाई करने के लिये कचरा फैलाया और बाद में उनसे झाड़ू लगवाई जैसे कि वाकई सभी जगह सफाई की गई है। वैसे प्रधानमंत्री जी तो केवल सां...
हंसराज सुज्ञ
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एक राजा को पागलपन की हद तक आम खाने का शौक था। इस शौक की अतिशय आसक्ति के कारण उन्हे, पाचन विकार की दुर्लभ व्याधि हो गई। वैद्य ने राजा को यह कहते हुए, आम खाने की सख्त मनाई कर दी कि "आम आपके जीवन के लिए विष समान है।" राजा का मनोवांछित आम, उसकी जिन्दगी का शत्रु बन गया।...
हंसराज सुज्ञ
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'मन' को जीवन का केंद्रबिंदु कहना शायद अतिश्योक्ति नहीं होगी। मनुष्य की समस्त क्रियाओं, आचारों का आरंभ मन से ही होता है। मन सतत तरह-तरह के संकल्प, विकल्प, कल्पनाएं करता रहता है।मन की जिस ओर भी रूचि होती है,उसका रुझान उसी ओर बढता चला जाता है, परिणाम स्वरूप मनुष्य की...