ब्लॉगसेतु

Shachinder Arya
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मुझे नहीं पता लोग कैसे लिखते हैं। पर जितना ख़ुद को जानता हूँ, यह लिखना किसी के लिए भी कभी आसान काम नहीं रहा। हम क्यों लिख रहे हैं(?) से शुरू हुए सवाल, कहीं भी थमते नहीं हैं। उनका सिलसिला लगातार चलता रहता है। पर एक बात है, जो इस सवाल का एक ज़वाब हो सकती है। वह यह कि ह...
Shachinder Arya
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वह पुल एक शांत पुल था। किसी नदी के ऊपर नहीं। दो इमारतों के बीच हवा में टंगा हुआ-सा। वह हमारे बचपन से पता नहीं कितने सारे तंतुओं को जोड़ता एक दिन गायब होता गया। उसका अस्तित्व हमारे लिए उतना ही ज़रूरी बनता गया जितना की हमारे फेफड़ों में भरती जाती हवा। उसका चले जाना उन ध...
chandan kumar jha
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 शब्द मेरे हो या तेरे कहानी एक ही लिखी जाएगी ।  साफ़ सफ़ेद पन्नों पर आर- पार दिखेगा अपना इतिहास ।
 पोस्ट लेवल : kavita अपना इतिहास कविता
Shachinder Arya
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पता नहीं यह कैसा भाव है। पर यह ऐसा ही है। गाँधी होना कितना मुश्किल है। कितनी कठिन हैं वह परिस्थितियाँ जिनके बीच सौ साल पहले दक्षिण अफ्रीका से वह लौटे होंगे। ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन अपने शासित उपनिवेशों की कीमत पर अभी प्रथम विश्व युद्ध लड़ रहा है। अगले तीन सालों में व...