ब्लॉगसेतु

जेन्नी  शबनम
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हाँ! मैं बुरी हूँ *******मैं बुरी हूँ   कुछ लोगों के लिए बुरी हूँ   वे कहते हैं-   मैं सदियों से मान्य रीति-रिवाजों का पालन नहीं करती   मैं अपनी सोच से दुनिया समझती हूँ   अपनी मनमर्ज़ी करती हूँ, बड़ी ज़िद्दी हू...
जेन्नी  शबनम
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वसीयत   ******* जीस्त के ज़ख्मों की कहानी तुम्हें सुनाती हूँ   मेरी उदासियों की यही है वसीयत   तुम्हारे सिवा कौन इस को सँभाले   मेरी ये वसीयत अब तुम्हारे हवाले   हर लफ्ज़ जो मैंने कहे हर्फ़-हर्फ़ याद रखना  &...
 पोस्ट लेवल : अपने जन्मदिन पर
जेन्नी  शबनम
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धरोहर   *******   मेरी धरोहरों में कई ऐसी चीज़ें हैं   जो मुझे बयान करती हैं   मेरी पहचान करती हैं   कुछ पुस्तकें जिनमें लेखकों के हस्ताक्षर   और मेरे लिए कुछ संदेश है   कुछ यादगार कपड़े जिसे मैं...