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kumarendra singh sengar
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इन दिनों बिटिया रानी के टेस्ट चल रहे हैं. पढ़ाई की तरह टेस्ट भी ऑनलाइन हो रहे हैं. इससे पहले छमाही परीक्षा भी ऑनलाइन ही हुई थी. वैसे यदि ऑनलाइन न कह कर उस परीक्षा और इस टेस्ट को वर्क फ्रॉम होम जैसी स्थिति कहें तो ज्यादा अच्छा होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि इन दोनों परीक्षा...
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जिस तरह से कोरोना संक्रमण की स्थिति दिखाई दे रही है, उसके अनुसार सरकारों द्वारा लॉकडाउन पुनः लगाये जाने के सम्बन्ध में जिस तरह के कदम उठाये जा रहे हैं, उन्हें देखकर लगता नहीं है कि शिक्षण संस्थान सहज रूप में जल्दी शुरू हो सकेंगे. प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के शिक्षण...
kumarendra singh sengar
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वर्तमान परिदृश्य में अभिभावकों के लिए बच्चों के मनोविज्ञान को समझना एक जटिल कार्य होता जा रहा है. उनके लिए बच्चों का लालन-पालन, उनकी परवरिश को लेकर भी आये दिन समस्याजनक होता जा रहा है. अभिभावकों और बच्चों का एकदूसरे के प्रति व्यवहार भी रूखा और असंयत होता दिखता है....
kumarendra singh sengar
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बेटियों के साथ होने वाली किसी भी घटना के बाद एक आम पोस्ट आती है कि बेटियों के बजाय बेटों को शिक्षा दें कि वे स्त्री को एक इन्सान समझें. हम बराबर और बार-बार कहते हैं कि समाज में स्त्री-पुरुष का, लड़के-लड़की का, बेटे-बेटी का भेद करने से कभी कोई सुधार नहीं आने वाला. बे...
अजय  कुमार झा
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दिन 27 जुलाई 2019समय प्रातः आठ बजेस्थान : अर्वाचीन भारती भवन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दिल्लीअवसर : विद्यालय में अभिभवक शिक्षक विद्यार्थी मिलनआज का दिन इतना खूबसूरत बनेगा सोचा नहीं था | कल शाम को बच्चों के स्कूल से अध्यापकों का फोन आया कि ,एक नए प्रयोग के रूप में हम...
kumarendra singh sengar
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बच्चों को सुबह जगाने, स्कूल के लिए तैयार करने के नाम पर चीखना-चिल्लाना; उनको नाश्ता कराने-भोजन करवाने के नाम पर क्रोधित होना; उनको पढ़ाने के नाम पर, होमवर्क करवाने के नाम पर खीझना जैसे अभिभावकों के बीच सामान्य गतिविधि होती जा रही है. संभव है कि ऐसा सभी घरों में न हो...
kumarendra singh sengar
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कोचिंग सेंटर्स की बढ़ती संख्या और उसमें आने वाले बच्चों का सैलाब. कोचिंग क्लास छूटते ही सैकड़ों की संख्या में बच्चों का सडकों पर निकल आना किसी भी छोटे-बड़े शहर का आम नजारा हो गया है. वर्तमान दौर में अंकों की मारा-मारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का अथक दबाव, सबसे आ...
kumarendra singh sengar
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ज्यों-ज्यों हम इंसानों ने विकास की राह पकड़ी, त्यों-त्यों रिश्तों की डोर को पीछे छोड़ने का उपक्रम बनाये रखा. हम आगे तो बढ़ते गये पर अपनी इंसानियत को बहुत पीछे छोड़ आये. हमने अपने अलावा किसी और पर विश्वास करना बन्द कर दिया है. अपने अतिरिक्त किसी दूसरे को अपने पास आने ला...
kumarendra singh sengar
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तमाम सारे विदेशी कार्यक्रमों की धूम-हंगामे के बीच एक-दो भारतीय पर्व ऐसे भी हैं जो बहुत शोर-शराबे से न सही मगर मना लिए जाते हैं. इनके मनाये जाने के पीछे सोशल मीडिया की भूमिका बहुत बड़ी है. किसी भारतीय पर्व के एक-दो दिन पहले से कुछ बैनर, कुछ चित्र, कुछ विचार सोशल मीडि...
kumarendra singh sengar
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आज खबर पढ़ने को मिली कि कानपुर में चार नाबालिगों ने चार साल की एक बच्ची के साथ सामूहिक दुराचार किया. इन चारों नाबालिगों में से एक की उम्र बारह वर्ष बताई गई है जबकि अन्य तीन की उम्र छह वर्ष से दस वर्ष के बीच है. बच्ची के पिता द्वारा की गई रिपोर्ट के बाद उन चारों बच्च...