ब्लॉगसेतु

Lokendra Singh
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'अभिव्यक्तिकी आजादी' पर एक बार फिर देशभर में विमर्श प्रारंभ हो गया है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर विवादित टिप्पणी करने और वीडियो शेयर करने के मामले में एक स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी से यह बहस प्रारंभ हुई है। इस बहस में एक जरूरी...
देव  कुमार झा
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पिछले लगभग एक साल से लेखन लगभग बंद सा था, आज कुछ बुद्धिजीवी वामपंथियों से अकारण ही बहस कर बैठा जिसमें मात्र मेरी स्वयं की ही ऊर्जा व्यर्थ नष्ट हुई! सोचा ऊर्जा व्यर्थ करने के स्थान पर ब्लॉग पर वापसी की जाए.... बदलते दौर में राजनीतिक ब्लॉगों की एक बाढ़ सी आई...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
Yashoda Agrawal
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मुट्ठी भर दिएमील भर अँधेरों कोचुनौती देते हैंशान से हँसते हैंऔर अँधेरेमन मसोस कर रह जाते हैं-:-यही तो हैअसली ताकतउजाले कीजब नन्ही सी रेखचीर देती है सीना अँधेरे काऔर अँधेरे देखते रह जाते हैं-:-अँधेरों का हठतोड़ने की ठान ली जबउस नन्हे से माटी के दिए नेहवाएँ अाँधियाँ...
Lokendra Singh
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- लोकेन्द्र सिंहसामाजिक कार्यकर्ता एवं सेवानिवृत्त शिक्षक श्री सुरेश चित्रांशी के हाथों में पुस्तक "हम असहिष्णु लोग"आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय है। आपातकाल के दौरान नागरिक अधिकारों एवं स्वतंत्रता का हनन ही नहीं किया गया, अपितु वैचारिक प्रतिद्वंदी एवं जनस...
Lokendra Singh
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 प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने लंदन प्रवास के दौरान 'भारत की बात, सबके साथ' कार्यक्रम में बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही है। उन्होंने एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा- 'आलोचनाएं लोकतंत्र की ब्यूटी होती है।' यह बात दरअसल, इसलिए महत्वूर्ण है, क्योंकि मोदी विरोध...
Lokendra Singh
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 कम्युनिस्ट  विचारधारा के विचारक एवं समर्थक उन सब राज्यों/देशों में अभिव्यक्ति की आजादी के झंडाबरदार बनते हैं, जहाँ उनकी सत्ता नहीं है। किंतु, जहाँ कम्युनिस्टों की सत्ता है, वहाँ वह अभिव्यक्ति की आजादी को पूरी तरह कुचल देते हैं। विशेषकर, कम्युनिस्ट विचारध...
Yashoda Agrawal
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तेरी ख़ातिर आहिस्ता,शायद क़ामिल हो जाऊँगा।या शायद बिखरा-बिखरा,सब में शामिल हो जाऊँगा॥शमा पिघलती जाती है,जब वो यादों में आती है।शायद सम्मुख आएगी,जब मैं आमिल हो जाऊँगा॥पेशानी पर शिकन बढ़ाती,जब वो बातें करती है।नहीं पता कब होश में आऊँ,कब क़ाहिल हो जाऊँगा॥उसकी नज़रें दर-किन...
Lokendra Singh
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 विरोध  की भाषा बताती है कि वह कितना नैतिक है और कितना अनैतिक। जब विरोधी भाषा की मर्यादा को त्याग कर गली-चौराहे की भाषा में बात करने लगें, समझिए कि उनका विरोध खोखला है। उनका विरोध चिढ़ में बदल चुका है। अपशब्दों का उपयोग करने वाला व्यक्ति भीतर से घृणा और न...
Yashoda Agrawal
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मेरे लिये शब्द एक औजार है.भीतर की टूट-फूटउधेडबुन अव्यवस्था और अस्वस्थताकी शल्यक्रिया के लिये।शब्द एक आईना,यदा-कदा अपने स्वत्व से साक्षात्कार के लिये।मेरे लिये शब्द संगीत है.ज़िन्दगी के सारे रागऔर सुरों को समेटे हुए।दोपहर की धूप में भोर की चहचहाट है तो रात...