ब्लॉगसेतु

Rajeev Upadhyay
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आज सूरज ने कुछ घबरा कररोशनी की एक खिड़की खोलीबादल की एक खिड़की बंद कीऔर अंधेरे की सीढियां उतर गया…आसमान की भवों परजाने क्यों पसीना आ गयासितारों के बटन खोल करउसने चांद का कुर्ता उतार दिया…मैं दिल के एक कोने में बैठी हूंतुम्हारी याद इस तरह आयीजैसे गीली लकड़ी में सेगह...
 पोस्ट लेवल : कविता अमृता प्रीतम
अनंत विजय
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अमृत कौर। सौ साल पहले एक ऐसी शख्सियत का जन्म हुआ था जिसने अपनी लेखनी और अपने व्यक्तित्व से भारतीय साहित्य को गहरे तक प्रभावित किया और दुनिया उसको अमृता प्रीतम के नाम से जानती है। उन्होंने जो जिया उसको ही लिखा । अविभाजित भारत में पैदा हुई अमृता को साहित्य का संस्कार...
 पोस्ट लेवल : इमरोज अमृता प्रीतम
अनंत विजय
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गगन गिल हिंदी की प्रतिष्ठित कवयित्री हैं। उनके कई कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और उन्होंने विपुल अनुवाद भी किया है। अंग्रेजी साहित्य में एम ए करने के बाद गगन गिल ने पत्रकारिता में अपना करियर शुरू किया लेकिन पत्रकारिता को छोड़कर वो पूर्णकालिक लेखक हो गईं। उनकी...
 पोस्ट लेवल : गगन गिल अमृता प्रीतम
kumarendra singh sengar
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यदि प्रेम में डूबी हुई कविताओं, रसीदी टिकट, साहिर और इमरोज की बात की जाये तो स्वतः ही एक नाम सामने आता है, अमृता प्रीतम का. उनका जन्म आज, 31 अगस्त 1929 को गुंजरावाला पंजाब (अब पाकिस्तान में) में हुआ था. बंटवारे के बाद उनका परिवार हिन्दुस्तान आ गया. ग्यारह वर्ष की उ...
शिवम् मिश्रा
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नमस्कार मित्रो,यदि प्रेम में डूबी हुई कविताओं, रसीदी टिकट, साहिर और इमरोज की बात की जाये तो स्वतः ही एक नाम सामने आता है, अमृता प्रीतम का. उनका जन्म आज, 31 अगस्त 1929 को गुंजरावाला पंजाब (अब पाकिस्तान में) में हुआ था. बंटवारे के बाद उनका परिवार हिन्दुस्तान आ गया. ग...
Bharat Tiwari
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ज़मीन की पगडंडियों पर चलते चलते इंसान जब लहूलुहान होता है, तब आयतें लिखीं जाती हैं। दर्द जब कतरा कतरा रिसने लगता है तो कलम से शब्द नहीं आयतें दर्ज हुई जाती हैं। उनके आगे कोई लफ्ज़ नहीं होता बयाँ करने के लिए, सिर्फ़ आँख के आंसू होते हैं। (adsbygoogle = window.adsbygoog...
रविशंकर श्रीवास्तव
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prabhat ranjan
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अमृता प्रीतम की यह कहानी तवायफ संस्कृति कुछ सबसे अच्छी कहानियों में है. इसकी नायिका लाहौर के हीरा मंडी की है. समाज पर तवायफों का क्या असर होता था, उनका क्या जलवा होता था- कहानी इसको बड़े अच्छे तरीके से सामने लाती है- मॉडरेटर=======================================उसे...
 पोस्ट लेवल : अमृता प्रीतम
kuldeep thakur
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पत्थर और चूना बहुत था, लेकिन अगर थोड़ी-सी जगह पर दीवार की तरह उभरकर खड़ा हो जाता, तो घर की दीवारें बन सकता था। पर बना नहीं। वह धरती पर फैल गया, सड़कोंकी तरह और वे दोनों तमाम उम्र उन सड़कों पर चलते रहे.... सड़कें, एक-दूसरे के पहलू से भी फटती हैं, एक-दूसरे के शरीर को...
 पोस्ट लेवल : कहानी अमृता प्रीतम
kuldeep thakur
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आज मैंनेअपने घर का नम्बर मिटाया हैऔर गली के माथे पर लगागली का नाम हटाया हैऔर हर सड़क कीदिशा का नाम पोंछ दिया हैपर अगर आपको मुझे ज़रूर पाना हैतो हर देश के हर शहर कीहर गली का द्वार खटखटाओयह एक शाप है यह एक वर हैऔर जहाँ भीआज़ाद रूह की झलक पड़ेसमझना वह मेरा घर है। &nbs...
 पोस्ट लेवल : अमृता प्रीतम कविता