ब्लॉगसेतु

ऋता शेखर 'मधु'
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बसंत की आहट के साथ हिन्दी हाइगा पर पदार्पण हो रहा है आ० अर्चना चावजी काअर्चना चावजीसारे चित्र गूगल से साभार
रेखा श्रीवास्तव
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                      वाकई  सपने तो सपने   हैं और वह जरूरी नहीं की हमारी इच्छा के  पूरे हो जाएँ . किसी के  सपने अधूरे ही रहकर कुछ  और  करने की प्रेरणा देते रहते हैं।...
केवल राम
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जीवन और साहित्य एक दूसरे के पर्याय हैं . जिस तरह जीवन की कोई सीमा नहीं , उसी तरह साहित्य को भी किसी सीमा में बांधना असंभव सा प्रतीत होता है . सीमा तो शरीरों की है . लेकिन भाव तो शाश्वत है , भाव मानव जीवन की अमूल्य पूंजी है और इसे अभिव्यक्त करने के माध्यम भी कई है ....
केवल राम
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जीवन एक अनवरत चलने वाली प्रक्रिया है. साँसों का यह सफ़र इंसान को किस पड़ाव तक ले जाए यह निश्चित नहीं है. जब तक साँसें चल रही है जीवन है, सांसें रुकी की नहीं जीवन समाप्त समझो. लेकिन साँसों के रुकने से जीवन समाप्त नहीं होता हमें यह बात समझ लेनी चाहिए. हालाँकि इस जीवन...
केवल राम
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जब भी मुझे कहीं अकेले में बैठने का अवसर मिलता है तो मैं महसूस  हूँ कि इस सृष्टि के कण - कण में संगीत है. इसमें सुर समाया है . लेकिन हम उस संगीत को अनुभव नहीं कर पाते . आज हम भौतिकता में इतने रम चुके हैं कि हमारे पास कहाँ वक्त है उस संगीत को सुनने, का अनुभव करन...
ललित शर्मा
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girish billore
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