ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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कार्यशाला अलंकार बताइये *अजर अमर अक्षर अजित, अमित असित अनमोल। अतुल अगोचर अवनिपति, अंबरनाथ अडोल।। *ललित लता लश्कर लहक, लक्षण लहर ललाम। लिप्त लड़कपन लजीला, लतिका लगन लगाम।। संजीव १६-११-२०१९ http://divyanarmada.blogspot.in/
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दोहा सलिला:अलंकारों के रंग-राखी के संगसंजीव 'सलिल'*राखी ने राखी सदा, बहनों की मर्याद.संकट में भाई सदा, पहलें आयें याद..राखी= पर्व, रखना.*राखी की मक्कारियाँ, राखी देख लजाय.आग लगे कलमुँही में, मुझसे सही न जाय..राखी= अभिनेत्री, रक्षा बंधन पर्व.*मधुरा खीर लिये हुए, बहि...
 पोस्ट लेवल : doha rakhi राखी दोहा अलंकार alankar
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:अलंकार चर्चा ०९ :यमक अलंकारभिन्न अर्थ में शब्द की, हों आवृत्ति अनेकअलंकार है यमक यह, कहते सुधि सविवेकपंक्तियों में एक शब्द की एकाधिक आवृत्ति अलग-अलग अर्थों में होने पर यमक अलंकार होता है. यमक अलंकार के अनेक प्रकार होते हैं.अ. दुहराये गये शब्द के पूर्ण-आधार पर यमक...
 पोस्ट लेवल : yamak alanakar यमक अलंकार
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अभिनव प्रयोग दृश्य काव्य- तीर अलंकार  *मैं बच्चा,बचपन से दूर हूँ। मत समझो बेबस-मजबूर हूँ। दुनिया बदल सकता मेहनत से अपनी। कहूँगा समय से कल- देख ले!मैं भी तो मशहूर हूँ।*** salil.sanjiv@gmail.c...
 पोस्ट लेवल : तीर अलंकार teer alankar
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दोहा सलिला: अलंकारों के रंग-राखी के संगसंजीव 'सलिल'*राखी ने राखी सदा, बहनों की मर्याद.संकट में भाई सदा, पहलें आयें याद..राखी= पर्व, रखना.*राखी की मक्कारियाँ, राखी देख लजाय.आग लगे कलमुँही में, मुझसे सही न जाय..राखी= अभिनेत्री, रक्षा बंधन पर्व.*मधुरा खीर लि...
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छंद की आधार भूमि काव्य संजीव वर्मा 'सलिल' परिचय: अन्यत्र पृष्ठ ३ पर*छंद: छंद की आत्मा ध्वनि और काया काव्य है। काव्य के बिना छंद की प्रतीति दुष्कर और छंद के बिना काव्य का लालित्य / चारुत्व नहीं होता। काव्य के विविध तत्व ही छंद की जड़ें ज़माने के लिए भूमि और छंद की फसल...
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रचना - प्रति रचना:समुच्चय और आक्षेप अलंकारघनाक्षरी छंद*गुरु सक्सेना नरसिंहपुर मध्य प्रदेश*दुर्गा गणेश ब्रह्मा विष्णु महेश पांच देव मेरे भाग्य के सितारे चमकाइयेपांचों का भी जोर भाग्य चमकाने कम पड़ेरामकृष्ण जी को इस कार्य में लगाइए।रामकृष्ण जी के बाद भाग्य ना चमक सकेल...
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चित्र अलंकार:समकोण त्रिभुज(वार्णिक छंद, सात पंक्ति, वर्ण १,२,३,४,५,६,७)*हूँ भीरु, डरता हूँ पाप से. .न हो सकता भारत का नेता डरता हूँ आप से.*है कौन जो रोके,मेरा मन मुझको टोंके,गलती सुधार.भयभीत मत हो. *जो करे फायर दनादनबेबस पर.बहादुर नहीं आतंकी है कायर.*हूँ नहीं सु...
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ॐफागुन[ चित्र अलंकार: झंडा ]*ठण्ड के आलस्य को अलविदा कहकर बसंती उल्लास को ले साथ, मिलकर- बढ़ चलें हम ज़िदगी के अगम पथ परआम के बौरों से जग में फूल-फलकर.रुकनहींजाएँ,हमेंमगदेखकर,पगबढ़ाना है.जूझ बाधा सेअनवरत अकेलेधैर्य यारों आजमाना है.प्रेयसी मंजिल नहीं मायूस हो...
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अभिनव प्रयास:चित्र अलंकार "ध्वज" ॐ-मन कहताजो, बात सुनो.आगे बढ़ो, बढ़ो आगे.जाग, उठो, पग धरो धरा परगिर-उठ, सँभल न रुक-चुक-थकहिकमत कर, कुछ कदम नवल रखपग-पग चल, कर में रख करभाग - दौडो, कूदो - फाँदो,हर बाधा को पार करो.हर मौसम मेंखिलफूलोंसम,धराहरीकर,हरेरहो.खुदमतलड़...