ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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 उजड़ रहा है साहेब धरा के दामन से विश्वास सुलग रही हैं साँसें कूटनीति जला रही है ज़िंदा मानस   सुख का अलाव जला भी नहीं दर्द धुआँ बन आँखों में धंसाता गया  निर्धन हुआ बेचैन  वक़्त...
ANITA LAGURI (ANU)
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ये मनधूं-धूं जलता है जब ये मनतन से रिसते ज़ख़्मों के तरलओढ़ के गमों केअनगिनत घाव जब जला आती हूँ अलाव कहींधीमी-धीमी आंच परसुलगता है ये मनउन सपनों की मानिंदजो आँखें यों  हीदेखती हैं  मेरीअनगिनत रतजगीरातों कोये धूं-धूं  जलता&...
दिव्या अग्रवाल
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रवीन्द्र  सिंह  यादव
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गाँव की चौपाल पर अलाव सामयिक चर्चा का फैलाव बिषयों का तीव्र बहाव मुद्दों पर सहमति-बिलगाव। बुज़ुर्ग दद्दू और पोते के बीच संवाद -दद्दू : *****मुहल्ले से        रमुआ ***** को बुला  लइओ ,        ...
mahendra verma
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धूप गरीबी झेलती, बढ़ा ताप का भाव,ठिठुर रहा आकाश है,ढूँढ़े सूर्य अलाव ।रात रो रही रात भर, अपनी आंखें मूँद,पीर सहेजा फूल ने, बूँद-बूँद फिर बूँद ।सूरज हमने क्या किया, क्यों करता परिहास,धुआँ-धुआँ सी जि़ंदगी, धुंध-धुंध विश्वास ।मानसून की मृत्यु से, पर्वत है हैरान,दुखी घ...
सुमन कपूर
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पुर्ज़ा पुर्ज़ा कर दिए हैं एहसास सूखे रिश्ते की पपड़ियों को कर दिया है इक्कट्ठा देखो ! जलने लगा है आरजूओं का अलाव धुआँ धुआँ !!सु-मन 
 पोस्ट लेवल : एहसास आरजू अलाव
Kailash Sharma
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बीता सो बीत गया, एक वर्ष और गया।सपने सब धूल हुएआश्वासन भूल गया,शहर अज़नबी रहाऔर गाँव भूल गया,एक वर्ष और गया।तन पर न कपड़े थेपर अलाव जलता था,तन तो न ढक पायेपर अलाव छूट गया,एक वर्ष और गया।खुशियाँ बस स्वप्न रहींअश्क़ न घर छोड़ सके,जब भी सपना जागाजाने क्यों टूट गया,एक वर्ष...