ब्लॉगसेतु

सुशील बाकलीवाल
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      कुछ दिनों पूर्व हमारे शहर में 5/- रु. के अच्छे-भले नोट लोगों ने लेना बंद कर दिया । कारण क्या हुआ ?  जवाब किसी के पास भी नहीं, बस हम नहीं लेंगे । अब आप बैठे रहो अपने उन पांच रुपये के करंसी नोटों को लेकर, नहीं चलेंगे याने नहीं चलेंगे । पहले...
Khushdeep Sehgal
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‘हम देखेंगे’ नज़्म क्या वाकई हिन्दू विरोधी या इससे डर की वजह कुछ और?फ़ैज़ अहमद फ़ैज- फोटो आभार: विकीमीडिया फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की नज़्म ‘’व-यबक़ा-वज्ह-ओ-रब्बिक (हम देखेंगे)” में बुत हटाने के मायने क्या वाकई हिन्दू धर्म और उसे मानने वालों के ख़िलाफ़ थे? क्या इंडियन...
DHRUV SINGH  "एकलव्य"
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                                                                   "सूनें वीरानों में कभी-...
Tejas Poonia
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ए अल्लाह, ए दो जहानों के मालिक ओ मालिक तेरा ये गुनाहगार बन्दा सारे गुनाहों की पोटली लेकर तेरी बारगाह में हाज़िर है। तू जानता है। कि मैं नहीं जानता कि आज़तक कितने गुनाह कर बैठा। कितनी बदतियाँ की, कितने झूठ बोले अग़र तू सबकुछ जानता है। तो तुझसे बेहतर कोई नहीं जानता और त...
sanjiv verma salil
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एक रचना- *सल्ललाहो अलैहि वसल्लम*सल्ललाहो अलैहि वसल्लमक्षमा करें सबको हम हरदम *सब समान हैं, ऊँच न नीचा मिले ह्रदय बाँहों में भींचा अनुशासित रह करें इबादत ईश्वर सबसे बड़ी नियामत भुला अदावत, क्षमा दान करद्वेष-दुश्म...