ब्लॉगसेतु

Ravindra Pandey
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भूल कर भय, तुम लहर की, भुजाएं पतवार कर लो।आगे बढ़ कर युद्ध लड़ लो, अश्रु सब अँगार कर लो।वीर तो केवल वही है, जिसे रण का भय न किंचित।उठो अब गांडीव लेकर,  प्रतिध्वनित  हुंकार भर लो।भावना, संवेदना, करुणा,  सकल  श्रृंगार  समुचित।युद्धभूमि का मान स...
Ravindra Pandey
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क्यों छूट गया हाथ से, आँचल का वो कोना।दुनिया मेरी आबाद थी, जिस के तले कभी।।एक तेरा साथ होना, था सबकुछ हमारे पास।हासिल जहां ये हमको, लगता है मतलबी।।परमपिता का जाने, ये कैसा अज़ीब न्याय।जिसको उठा ले जाये, चाहे वो जब कभी।।सहमी हुई है  धड़कन,  बदहवास  है&n...
DHRUV SINGH  "एकलव्य"
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                                                    "तूँ है एक अनुपम तस्वीर" 'नारी'  चिरस्थाई जीवन वट "नारी" चिरस्थाई जी...
Kailash Sharma
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हर वक़्त है तुम्हारा,बहने लगते अनवरतनिभाते हैं साथ दुखों के पल में,नहीं जाते दूर छलक जाते हैंखुशियों के पल में।छलके थे आँखों से देखा ज़ब अचानक देहरी पर तुमको और छुप गए तुम्हारी बाहों में,बरसे हैं फ़िर से ये सावन के बादल से&...
Kailash Sharma
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कैसे देखूं मैं अब सपने, इन आँखों में अश्रु भरे हैं,नींद खडी है दरवाज़े पर, हर कोने में दर्द खड़े हैं।रातों का हर पहर डराता तिमिर ढांक अंतस को जाता,रात अमावस की काली में कोई अस्तित्व नज़र न आता,कैसे हाथ बढ़ा कर पकडूँसौगंधों के शूल गढ़े हैं।धूमिल हुई ह...