ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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इसाक अश्क़ जन्म- १ जनवरी १९४५ को तराना, उज्जैन, म.प्र., भारत में।प्रकाशित कृतियाँ-गीत संग्रह- सूने पड़े सिवान, फिर गुलाब चटके, काश हम भी पेड़ होते, लहरों के सर्पदंश।संपादन- समांतर पत्रिकापुरस्कार-सम्मान-गीत संग्रह 'सूने पड़े सिवान' पर मध्यप्रदेश शासन का पुरस्का...
 पोस्ट लेवल : इसाक अश्क़
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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सुनो मेघदूत!अब तुम्हें संदेश कैसे सौंप दूँ, अल्ट्रा मॉडर्न तकनीकी से, गूँथा गगन ग़ैरत का गुनाहगार है अब, राज़-ए-मोहब्बत हैक हो रहे हैं!हिज्र की दिलदारियाँ, ख़ामोशी के शोख़ नग़्मे, अश्क़ में भीगा गुल-ए-तमन्ना, फ़स्ल-ए-बहार में, दिल की धड़क...
Kailash Sharma
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गीला कर गयाआँगन फिर से,सह न पायाबोझ अश्क़ों का,बरस गया।****बहुत भारी हैबोझ अनकहे शब्दों का,ख्वाहिशों की लाश की तरह।****एक लफ्ज़जो खो गया था,मिला आजतेरे जाने के बाद।****रोज जाता हूँ उस मोड़ पर जहां हम बिछुड़े थे कभी अपने अपने मौन के साथ,लेकिन रोज टूट जाता स्वप्नथामने से...
Kailash Sharma
174
कुछ दर्द अभी तो सहने हैं,कुछ अश्क़ अभी तो बहने हैं।मत हार अभी मांगो खुद से,मरुधर में बोने सपने हैं।बहने दो नयनों से यमुना,यादों को ताज़ा रखने हैं।नींद दूर है इन आंखों से,कैसे सपने अब सजने हैं।बहुत बचा कहने को तुम से,गर सुन पाओ, वह कहने हैं।कुछ नहीं शिकायत तुमने की,यह...
Kailash Sharma
174
मत बांटो ज़िंदगीदिन, महीनों व सालों में,पास है केवल यह पलजियो यह लम्हाएक उम्र की तरह।****रिस गयी अश्क़ों मेंरिश्तों की हरारत,ढो रहे हैं कंधों परबोझ बेज़ान रिश्तों का।****एक मौनएक अनिर्णयएक गलत मोड़कर देता सृजितएक श्रंखलाअवांछित परिणामों की,भोगते जिन्हें अनचाहेजीवन पर्य...
सुमन कपूर
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गिरा तेरी आँख से इक क़तरा अश्क कामेरा दामन यूँ सेहरा से सागर बन गया ।।सु-मन 
 पोस्ट लेवल : अश्क़ दामन
kuldeep thakur
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    बीते वक़्त कीएक मौज लौट आई, आपकी हथेलियों पर रचीहिना फिर खिलखिलाई। मेरे हाथ पर अपनी हथेली रखकर दिखाए थे हिना  के  ख़ूबसूरत  रंग, बज उठा था ह्रदय में अरमानों का जल तरंग।छायी दिल-ओ-दिमाग़ पर कुछ इ...
Kailash Sharma
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ढलका नयनों सेनहीं बढ़ी कोई उंगली थामने पोरों पर,गिरा सूखी रेत में खो दिया अपना अस्तित्व,शायद यही नसीब थामेरे अश्क़ों का।*****आज लगा कितना अपना सा सितारों की भीड़ में तनहा चाँद सदियों से झेलता दर्द प्रति दिन घटते बढ़ने का,जब भी बढ़ता  वैभवदे...
Kailash Sharma
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आज दिल ने है कुछ कहा होगा,अश्क़ आँखों में थम गया होगा।आज खिड़की नहीं कोई खोली,कोइ आँगन में आ गया होगा।आज सूरज है कुछ इधर मद्धम,केश से मुख है ढक लिया होगा।दोष कैसे किसी को मैं दे दूं,तू न इस भाग्य में लिखा होगा।दोष मेरा है, न कुछ भी तेरा,वक़्त ही बावफ़ा न रहा होगा।...©क...
Kailash Sharma
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ज़िंदगी कुछ नहीं कहा तूने,मौन रह कर सभी सहा तूने।रात भर अश्क़ थे रहे बहते,पाक दामन थमा दिया तूने।लगी अनजान पर रही अपनी,दर्द अपना नहीं कहा तूने।फूल देकर सदा चुने कांटे,ज़ख्म अपना छुपा लिया तूने।मौत मंज़िल सही जहां जाना,राह को पुरसुकूँ किया तूने।~~©कैलाश शर्मा