ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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 कुछ हर्षाते लम्हे अनायास ही मौन में मैंने धँसाये  थे  आँखों  के पानी से भिगो कठोर किया उन्हें  साँसों की पतली परत में छिपा ख़ामोश किया था जिन्हें फिर भी  हार न मानी उन्हो...
Kailash Sharma
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बाँध लेते जब स्वयं कोकिसी विचार, व्यक्ति या वस्तु से,खो देते अपना अस्तित्व और बंध जाते उसके अस्तित्व से।मत बांधो अपनी नौका किसी किनारेबहने दो साथ लहरों के,देखो अपने चारों ओर दृष्टा भाव सेहोते अनवरत बदलाव,अप्रभावित तुम्हारा अस्तित्व जिस से।जब होता जाग्रत दृष्टा...