ब्लॉगसेतु

Rajeev Upadhyay
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रोज़ जब धूप पहाड़ों से उतरने लगतीकोई घटता हुआ बढ़ता हुआ बेकल सायाएक दीवार से कहता कि मेरे साथ चलो।और ज़ंजीरे-रफ़ाक़त से गुरेज़ाँ दीवारअपने पिंदार के नश्शे में सदा ऐस्तादाख़्वाहिशे-हमदमे-देरीना प’ हँस देती थी।कौन दीवार किसी साए के हमराह चलीकौन दीवार हमेशा मगर ऐस्त्त...
 पोस्ट लेवल : कविता अहमद फ़राज़
kuldeep thakur
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इस से पहले कि बेवफा हो जाएँक्यूँ न ए दोस्त हम जुदा हो जाएँतू भी हीरे से बन गया पत्थरहम भी कल जाने क्या से क्या हो जाएँहम भी मजबूरियों का उज़्र करेंफिर कहीं और मुब्तिला हो जाएँअब के गर तू मिले तो हम तुझसेऐसे लिपटें तेरी क़बा हो जाएँबंदगी हमने छोड़ दी फ़राज़क्या करें...
 पोस्ट लेवल : अहमद फ़राज़
Abhishek Kumar
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सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैंसो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैंसुना है रब्त है उसको ख़राब हालों सेसो अपने आप को बरबाद करके देखते हैंसुना है दर्द की गाहक है चश्म-ए-नाज़ उसकीसो हम भी उसकी गली से गुज़र कर देखते हैंसुना है उसको भी है शेर-ओ-शायरी से शगफ़सो ह...