ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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इश्क़ की दुनिया मेंढलते-ढलते रुक जाती है रातहुक़ूमत दिल पर करते हैं जज़्बातज़ुल्फ़ के साये में होती  है शामसाहब-ए-यार  के  कूचे से गुज़रे  तो हुए बदनामसाथ निभाने का पयामवफ़ा का हसीं पैग़ामआँख हो जाती है जुबां हाल-ए-दिल सुनाने कोक़ुर्बान होती है शमा...
Ravindra Pandey
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मैं ढूंढ रहा उस बचपन को,जाने कब कैसे फिसल गया...रुकने को बोला था कितना,देखो वो जिद्दी निकल गया...अब की बार जो मिल जाये,मैं उसकी कान मरोडूँगा...कितना भी फिर वो गुस्साये,नहीं उसकी बाँह मैं छोडूंगा...लेकिन वो निश्छल बचपन भी,कब लौट के फिर आ पाता है...अक्सर फिर छोटे बच्...
Ravindra Pandey
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कहती हैं दर-ओ-दीवारें सभी,फिर कब वो मौसम आयेगा...मैं झूम उठूँगा बरबस ही,बचपन आँगन में समायेगा...वो खुली गगन के नीचे सब,फिर खाट लगाकर सोएंगे...जब डाँट पड़ेगी नानी की,चिल्ला चिल्ला कर रोयेंगे...फिर मामी यूँ पुचकारेगी,मुठ्ठी में शक्कर डारेगी...मौसी देखेगी कनखियों से,बि...
Ravindra Pandey
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लिखी थी ईबारत, फ़लक पे कहीं...पढ़ ना पाया, रही आँखों में कुछ नमी...मैं तो बढ़ता रहा, मंजिलों की तरफ...लोग लिखते रहे, बस एक मेरी कमी...नहीं अफ़सोस, हासिल भले कुछ नहीं...उस फ़लक से है बेहतर, मेरी ये जमीं...सुन ओ तकदीर, ग़र कहीं रहता है तू...उस फरिश्ते से बेहतर, मैं आम आदमी...
पत्रकार रमेश कुमार जैन उर्फ निर्भीक
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क़ानूनी समाचारों पर बेबाक टिप्पणियाँ (8) प्रिय दोस्तों व पाठकों, पिछले दिनों मुझे इन्टरनेट पर हिंदी के कई लेख व क़ानूनी समाचार पढने को मिलें.उनको पढ़ लेने के बाद और उनको पढने के साथ साथ उस समय जैसे विचार आ रहे थें.उन्हें व्यक्त करते हुए हर लेख के साथ ही अपने अनुभव के...