ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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नाव डगमग डोली तो माँझी पर टिक गयीं आशंकित आशान्वित आँखें, कोहरा खा गया दिन का भी उजाला अनुरक्त हो भँवरे की प्रतीक्षा कर रहीं सुमन पाँखें। सड़क-पुल के टेंडर अभी बाक़ी हैं कुछ अनजाने इलाक़ों में बहती नदियों और...
sanjiv verma salil
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द्विपदी *सबको एक नजर से कैसे देखूँ ?आँखें भगवान् ने दो-दो दी हैं *उनको एक नजर से ज्योंही देखा आँख मारी? कहा और पीट दिया *दोहाअपनी छवि पर मुग्ध हो, सैल्फी लेते लोग लगा दिया चलभाष ने, आत्म मोह का रोग*http://divyanarmada.blogspot.in/
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं हम अक्सर अपने व्यंजनों में नमक का उपयोग करते हैं जबकि काली मिर्च डालना भूल जाते हैं। लेकिन काली मिर्च के फायदे कहीं बेहतर हैं। काली मिर्च नाटकीय रूप...
 पोस्ट लेवल : काली मिर्च आँखें
Yashoda Agrawal
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मुस्कुराता हुआ ख़्वाब है आँखों मेंमहकता हुआ गुलाब है आँखों मेंबूँद-बूँद उतर रहा है मन आँगनएक कतरा माहताब  है आँखों मेंउनकी बातें,उनका ही ख़्याल बसरोमानियत भरी किताब है आँखों मेंजिसे पीकर भी समन्दर प्यासा हैछलकता दरिया-ए-आब है आँखों मेंलम्हा-लम्हा बढ़ती बेताबी द...
 पोस्ट लेवल : आँखें श्वेता सिन्हा
Tejas Poonia
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कल शाम विशाल पंड्या निर्देशित तथा उर्वशी रौ&#2340...
sanjiv verma salil
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एक मुक्तक: दे रहे हो तो सारे गम दे दो चाह इतनी है आँखें नम दे दो होंठ हँसते रहें हमेशा ही लो उजाले, दो मुझे तम दे दो*http://divyanarmada.blogspot.in/
Madabhushi Rangraj  Iyengar
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आज दिन में एक वाट्सप फ्रेंड ने यह आँखों देखी खबर भेजा. आप सब के रसास्वादन हेतु प्रस्तुत है... आँखों देखी     एक चिड़ा लगातार कोशिश कर रहा है      अपने बच्चे को उड़ना सिखाने की              &...
लोकेश नशीने
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बिछड़ते वक़्त तेरे अश्क़ का हर इक क़तरालिपट के रास्ते से मेरे तरबतर निकलाखुशी से दर्द की आँखों में आ गए आंसूमिला जो शख़्स वो ख़्वाबों का हमसफ़र निकला (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); रोज दाने बिखेरता है जो परिंदों कोउसके तहख़ाने से कटा हुआ शजर निकला...
kuldeep thakur
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ख़ामोश अदा चेहरे की ,व्यंगपूर्ण मुस्कान या ख़ुद को समझाता तसल्ली-भाव....?आज आपकी डबडबाई आखों में आयरिस  के आसपास, तैरते हुए चमकीले मोती देखकर.....मेरे भीतर भी कुछ टूटकर बिखर-सा गया है ......!   ज़ार-ज़ार रोती आँखें मुझे भाती नहीं...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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ख़ामोश अदा चेहरे की ,व्यंगपूर्ण मुस्कान ,या ख़ुद को समझाता तसल्ली-भाव....?आज आपकी डबडबाई आखों में रेटिना के आसपास तैरते हुए चमकीले मोती देखकर.....मेरे भीतर भी कुछ टूटकर बिखर-सा गया है ......   ज़ार-ज़ार रोती आँखें मुझे भाती नहीं ,आँखे...