ब्लॉगसेतु

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 *आँसू*आँसू ही बताते यहां मिलना बिछड़ना भी।बेटी की विदाई में ये पिता को सताते हैं ।प्यार मनुहार में येक्रोध अहंकार में ये।पलकों से गिर गिरभेद को छिपाते हैं ।आँसू की अनोखी बातचाहे दिन हो या रात ।सुख दुख घड़ियों कोसाथ ही बिताते हैं।हार जीत प्रेम प्रीतदु...
Nitu  Thakur
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नवगीतआँसूनीतू ठाकुर 'विदुषी'मापनी 16/16घाव हँसे खुशियों के आँसूं एक और की चाहत कहकर।।प्रीत हृदय में मौन खड़ी थीभाव पड़े अंतस के ढह कर1विरह गीत लिख रही लेखनीआज डूब कर स्याही मेंछोड़ सिसकता भूल गया जोनेह खोजती राही मेंबंद द्वार पाषाणी हिय मेंमुक्त हुए कुछ दिन ही रह...
अनीता सैनी
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पन्ना धाय तुम्हारे आँसुओं से भीगे, खुरदरे मोटे इतिहास के पन्ने, जिनमें सीलन मिलती है आज भी,कर्तव्यनिष्ठा राष्ट्रप्रेम की।ज़िक्र मिलता है ममत्व में सिमटी, तुम्हारे भीगे आँचल की मौन कोर का,   पुत्र की लोमहर्षक करुण कथा का बखान, ...
मुकेश कुमार
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खिलखिलाहट से परेरुआंसे व्यक्ति की शायद बन जाती है पहचान,उदासियों में जब ओस की बूंदों सेछलक जाते हों आंसूतो एक ऊँगली पर लेकर उनकोये कहना, कितना उन्मत लगता है नाकि इस बूंद की कीमत तुम क्या जानो, लड़की!खिलखिलाते हुए जब भी तुमने कहामेरी पहचान तुम से है बाबूमैंने बस उस स...
sanjiv verma salil
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मुक्तक*सिर्फ पानी नहीं आँसू, हर्ष भी हैं दर्द भी। बहाती नारी न केवल, हैं बनाते मर्द भी।।गर प्रवाहित हों नहीं तो हृदय ही फट जाएगा-हों गुलाबी-लाल तो होते कभी ये जर्द भी।।***http://divyanarmada.blogspot.in/
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संतोष त्रिवेदी
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उनका टिकट फिर कट गया।इस बार पूरी उम्मीद थी कि जनता की सेवा करने का टिकट उन्हें ही मिलेगा।पिछले पाँच साल से वे इसी आस पर टिके हुए थे,पर अनहोनी हो गई।उनकी आस में दिन-दहाड़े सेंध लग गई।आख़िरी सूची से उनका नाम नदारद हो गया।दरअसल दल के एक बड़े पदाधिकारी का ‘छुटका’ बेटा...
sanjiv verma salil
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लघुकथा:गरम आँसू*टप टप टपचेहरे पर गिरती अश्रु-बूँदों से उसकी नीद खुल गयी, सास को चुपाते हुए कारण पूछा तो उसने कहा- 'बहुरिया! मोय लला से माफी दिला दे रे! मैंने बापे सक करो. परोस का चुन्ना कहत हतो कि लला की आँखें कौनौ से लर गयीं, तुम नें मानीं मने मोरे मन में संका को...
Madabhushi Rangraj  Iyengar
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                                            आँसूं किसी की साँसों में ना घोलो अपनी साँसों को, उनमें मिलकर वो अपनी अहमियत को खो देंगी किसी की स...
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sanjiv verma salil
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एक कालजयी गीत:मेरा नाम लिया जाएगा- गोपालदास सक्सेना "नीरज"*आँसू जब सम्मानित होंगे, मुझको याद किया जाएगाजहाँ प्रेम का चर्चा होगा, मेरा नाम लिया जाएगा*मान-पत्र मैं नहीं लिख सका, राजभवन के सम्मानों कामैं तो आशिक़ रहा जन्म से, सुंदरता के दीवानों कालेकिन था मालूम नहीं य...
ganga dhar sharma hindustan
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ग़ज़ल : कुत्तों से मात सिंह जो खाएँ तो क्या करें.(221 2121 1221 212)बहने लगी हैं उल्टी हवाएँ तो क्या करें.कुत्तों से मात सिंह जो खाएँ तो क्या करें.वो ही लिखा है मैंने जो अच्छा लगा मुझे.नासेह सर को अपने खपाएँ तो क्या करें.जल्लाद हाथ में जब खंजर उठा चुका.खौफे अजल न तब...