आज हिंदी में इस बात को लेकर बहुधा सवाल खड़े होते हैं कि कोई कालजयी कृति क्यों सामने नहीं रही । कालजयी ना भी तो अपने समय को झकझोर देनेवाली कहानी या उपन्यास क्यों नहीं लिखे जा रहे हैं । क्या वजह है कि असगर वजाहत की ‘कैसी आई लगाई’ चित्रा मुद्गल की ‘आवां’, भगवानदास मोर...