ग़ज़लBy Sanjay Groverपहले सब माहौल बनाया जाता हैफिर दूल्हा, घोड़े को दिखाया जाता हैजिन्हें ज़बरदस्ती ही अच्छी लगती हैउनको घर पे जाके मनाया जाता हैझूठ को जब भी सर पे चढ़ाया जाता हैसच को उतनी बार दबाया जाता हैदो लोगों में इक सच्चा इक झूठा हैबार-बार यह भ्रम फैलाया जाता हैआ...