इस कलयुग में भी ज्यादातर इंसान कुछ अच्छा करना चाहते हैं ताकि समाज का कुछ भला हो, वे किसी के आँसू पोंछ सके। लेकिन जवानी में रोजी-रोटी कमाने से फ़ुरसत नहीं मिलती और बुढ़ापे में जर्जर काया एवं सीमित संसाधनों के कारण क्या करें ये इंसान समझ नहीं पाता! आइए, आज मैं आपको म...