ब्लॉगसेतु

Ashish Shrivastava
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महान यूनानी दार्शनिक अरस्तू ने कहा था कि मनुष्य स्वभावतः जिज्ञासु प्राणी  है तथा उसकी सबसे बड़ी इच्छा ब्रह्माण्ड की व्याख्या करना है। ब्रह्माण्ड की कई संकल्पनाओं ने मानव मस्तिष्क को हजारों वर्षों से उलझन में डाल रखा है। वर्तमान में वैज्ञानिक ब्रह्माण्ड की सूक्ष्मत...
Ashish Shrivastava
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हम तारों की दूरी कैसे ज्ञात कर लेते है ? हम कैसे बता पाते है की उस तारे की दूरी उतनी है इस तारे की दूरी इतनी है ? यह ऐसे सवाल है जो विज्ञान विश्व पृष्ठ पर सबसे ज्यादा लोगो ने सबसे ज्यादा बार पूछा है। ब्रह्माण्ड में स्थित तारों, ग्रहों या आकाशगंगाओं की दूरी को माप...
Ashish Shrivastava
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आइंस्टाइन ने अपने सापेक्षतावाद सिद्धांत के द्वारा विश्व का अंतरिक्ष, समय, द्रव्यमान, ऊर्जा और गुरुत्वाकर्षण के प्रति दृष्टिकोण बदल कर रख दिया था। 1. आइंस्टाइन से पहले गति के को समझने के लिये आइजैक न्यूटन के नियमो का प्रयोग किया जाता था। 1687 मे न्यूटन ने प्रस्तावि...
प्रदीप  कुमार
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संवत्सर की वैज्ञानिकता                                                                                                                                -श्री विष्णुप्रसाद चतुर्वेदी समय का हिसाब रखना आज के मनुष्य के लिए कोई कठिन कार्य नहीं है। छपे कलैण्डर, हाथ में बंध...
प्रदीप  कुमार
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इस प्रभाव की खोज आस्ट्रिया के प्रसिद्ध भौतिकविद् क्रिश्चियन डॉप्लर ने 1842 ई० में की थी। इस प्रभाव के बारे में जानने के लिए हम रेलवे-स्टेशन चलेंगे। जब भी हम किसी भी रेलवे-प्लेटफार्म से इस प्रभाव का प्रेक्षण करते हैं, तब हम देखतें हैं कि, जब रेलगाड़ी हमारी ओर गतिमान...
प्रदीप  कुमार
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मानव हजारों वर्षों से निरभ्र आकाश में दिखाई देने वाले तारों का निरीक्षण करता आया हैं । अक्सर लोगों के दिमाग में यह प्रश्न उठते हैं कि आकाश के ये तारे हमसे कितनी दूर हैं? ये सतत क्यों चमकते रहते हैं? ये कब तक चमकते रहेंगे? क्या इन तारों का जन्म होता हैं? क्या इनकी म...
Arshia Ali Ali
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अमरीकी अन्तरिक्ष संस्था 'नासा' के अनुसार हमारी अपनी निहारिका में (जिसे मिल्की वे गेलेक्सी Milky Way Galaxy या दूध गंगा भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें सितारों की एक दूधिया पट्टी सी ही फैली हुई दिखलाई देती है) कम से कम उतने ही ग्रह भी मौजूद हो सकते हैं जितने की सितारे...