ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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बच्चों को सुबह जगाने, स्कूल के लिए तैयार करने के नाम पर चीखना-चिल्लाना; उनको नाश्ता कराने-भोजन करवाने के नाम पर क्रोधित होना; उनको पढ़ाने के नाम पर, होमवर्क करवाने के नाम पर खीझना जैसे अभिभावकों के बीच सामान्य गतिविधि होती जा रही है. संभव है कि ऐसा सभी घरों में न हो...
kumarendra singh sengar
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अनादिकाल से समाज ने शांति, अहिंसा, सौहार्द्र, स्नेह आदि-आदि सिखाने का काम किया है और उसी के सापेक्ष समाज ने ही अशांति, हिंसा, वैमनष्यता, बैर आदि सीखने का काम किया है. यहाँ विचारणीय है कि इंसान को लगातार प्रेम, दया, करुणा आदि का पाठ पढ़ाया जाता रहा है. उसे समझाया गया...
kumarendra singh sengar
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फिर एक आत्महत्या, फिर एक युवा का चले जाना. दुःख भी होता है, क्षोभ भी होता है मगर बहुत सारे अनुत्तरित से सवाल सामने आ जाते हैं. तमाम तरह की अनिश्चितता सामने आ जाती है. संभावनाओं के इस दौर में भी युवा-शक्ति का अनिश्चय के साये में ज़िन्दगी बिताना और फिर हताशा में मौत क...
जन्मेजय तिवारी
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                   सुबह से ही करीमन की दुकान पर भीड़ उमड़ने लगी थी । आस-पास के सभी लोग तो लेट-लतीफ ट्रेनों की तरह काफी पीछे चल रहे थे । उनके लिए तो उसकी दुकान पर जाना रोजमर्रा की ही बात थी । उन्हें लगा कि रोज व...
kumarendra singh sengar
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हिन्दू धर्म के अंधविश्वासों को दूर करने की दिशा में कार्य करते हुए एक सामाजिक कार्यकर्ता और एक साहित्यकार शहीद हो गए. बहुतों को इस शहीद शब्द पर आपत्ति हो सकती है, होनी भी चाहिए क्योंकि शहीद शब्द इतना मामूली नहीं कि किसी की मौत के लिए इस्तेमाल किया जाये. यहाँ भी हमा...
kumarendra singh sengar
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          प्रशासन का दायित्व किसी भी रूप में शांति व्यवस्था बनाये रखना होता है. इसके लिए कई बार प्रशासन की तरफ से कठोर कदम उठाये जाते हैं. इन कठोर क़दमों में अकसर प्रशासनिक स्तर पर लाठीचार्ज करना, आँसू गैस के गोले छोड़ना,...
Kailash Sharma
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अंतस का कोलाहलरहा अव्यक्त शब्दों में,कुनमुनाते रहे शब्दउफ़नते रहे भावउबलता रहा आक्रोशउठाने को ढक्कन शब्दों के मौन का।बहुत आसान है फेंक देना शब्दों को दूसरों पर आक्रोश में,हो जाते शब्दशांत कुछ पल को हो जाती संतुष्टि अभिव्यक्ति की।होने पर शांत तूफ़ा...
kumarendra singh sengar
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बच्चों के लिए ‘बस दो मिनट’ में तैयार होने वाली मैगी संकट की स्थिति में दिख रही है. मनमाफिक घरेलू पकवानों, नाश्ते की स्वादिष्ट परम्परा को समाप्त करके मैगी विगत कई वर्षों से माताओं के लिए वरदान साबित हो रही थी. किसी भी समय नाश्ते में, भोजन में. छुट्टियों में, सुबह म...
Kailash Sharma
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करते जब खिलवाड़ अस्तित्व से प्रकृति की  विकृत करते उसका रूपविकास के नाम पर,अंतस का आक्रोश और आँखों के आंसू बन जाते कभी सैलाब कभी भूकंप और बहा ले जाते जो भी आता राह में.समझो घुटन को प्रकृति की चीत्कार को दबी कंक्रीट के ढेर के नीचेतरसती एक ताज़ा सांस को,प्रकृति नह...
kumarendra singh sengar
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नागालैंड में भीड़ द्वारा एक बलात्कारी को जेल से बाहर निकाल कर सरेआम उसकी हत्या कर चौराहे पर लाश लटकाने की घटना से देश भर में न्याय-प्रक्रिया को लेकर, बलात्कार के आरोपियों की सजा को लेकर, सजा सुनाये जाने की समयावधि को लेकर बहस छिड़ गई है. इस घटना के ठीक पूर्व एक मीडि...