ब्लॉगसेतु

YASHVARDHAN SRIVASTAV
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जीवन कि लड़ाइयों से,लड़ रहा हूं मैंचाहे कुछ भी हो लेकिन,आगे बढ़ रहा हूं मैंकुछ इस कदरनदी के रूप सा, ढल रहा हूं मैंतपती धूप में भीचल रहा हूं मैं।।
YASHVARDHAN SRIVASTAV
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भूल जाओ कल की करनी आज से ही शुरुआत करनीहै आज का महत्व बड़ाक्योंकि आज पे ही तेरा कल खड़ाआज का आगाज है अरे कल क्या विश्वास हैआज से ही हाथ मिलाआज बस कदम बढ़ाहै आज का महत्व बड़ाक्योंकी आज पे ही तेरा कल खड़ाजो करना है आज करोकल की ना तुम बात करोकल का तो हैइंतजार बड़ाहै आ...
ज्योति  देहलीवाल
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हम बच्चों को किताबी ज्ञान रटना सिखाते हैं...स्कूल से आया नहीं कि ट्यूशन क्लास भेजते हैं...ढेर सारी अन्य क्लासेस में भेजते हैं ताकि हमारा बच्चा सुपर हीरो बन सके...लेकिन अफ़सोस लाइफ स्किल्स नहीं सिखाते!! नहीं सिखाते कि विपरीत परिस्थितियों में शांत चित्त रह कर मुसीबतों...
विजय राजबली माथुर
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जब 1986 में मैं भाकपा में शामिल हुआ था तब कामरेड राम स्वरूप दीक्षित AICP ,  आगरा के जिलामंत्री थे। लेकिन भाकपा के कई कार्यक्रमों में उनसे मुलाक़ात होती रहती थी। जूनियर डाक्टरों की हड़ताल के समर्थन में निकाले गए मशाल जुलूस में भी वह शामिल हुये थे और भाकपा नेताओं...
विजय राजबली माथुर
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कल - आज और कल ===============कभी - कभी कुछ विशेष परिस्थितियों में अतीत के कुछ पल यों मस्तिष्क में घूम जाते हैं जैसे यह पिछले कल के दिन की ही बात है। * ठीक 50 वर्ष पूर्व 1969 में जब मेरठ कालेज , मेरठ में बी ए में प्रवेश लिया तब राजशास्त्र ( pol sc), अर्थशा...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )  संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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दिल्ली में अचानक शरद ऋतु में गर्मी बढ़ीहुई हवा से नज़ाकत नमी नदारत साँसों में बढ़ती ख़ुश्की बहुत हलकान ज़िन्दगी झरे पीले पत्ते पेड़ों से घाम में घिसटती घास तपन से मुरझा गयीगर्म हवा ने रुख़ किया अपने आसम...
विजय राजबली माथुर
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जन्मदिन मुबारक हो। हम आपके सुंदर, सुखद,स्वस्थ, समृद्ध और दीर्घायुष्य जीवन की मंगलकामना करते हैं।  तृतीय भाव में परस्पर विरोधी ग्रहों की स्थिति और उस भाव में स्थित राशि के स्वामी की परस्पर विरोधी ग्रह की राशि में स्थिति से साफ - साफ स्पष्ट है कि, आपके भाई&...
ganga dhar sharma hindustan
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................ग़ज़ल.......................बिल्ली के भाग जोर लगाएँ तो क्या करें.मोरों के झुण्ड शोर मचाएँ तो क्या करें.मुर्गा नहीं दे बांग, सिखाया कई दफा.देता रहा ये किन्तु सदाएँ तो क्या करें.बच्चों को इल्म हो कि पराये जो शख्स हैंवो टॉफियों के ख्वाब दिखाएँ तो क्या कर...
विजय राजबली माथुर
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कश्मीर संबंधी यह विवरण पढ़ कर 37 वर्ष पूर्व के कुछ समय वहाँ बिताए अपने संस्मरण याद पड़ गए। उस समय भी कश्मीर व लद्दाख(करगिल )   दोनों के निवासियों का व्यवहार काफी अच्छा पाया था। इस विवरण से ज्ञात हुआ कि आज भी वहाँ के लोग अच्छे ही हैं। * मई 1981 में होटल...
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