ब्लॉगसेतु

केवल राम
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भारतीय जन जीवन को जब देखते हैं तो यहाँ पर शुभकामनाओं की बड़ी महता नजर आती है । सोने से लेकर जागने तक, शाम से सुबह तक, मृत्यु से जीवन तक, जड़ से चेतन तक, युद्ध से शांति तक, हार से जीत तक, प्रकृति से परमात्मा तक । शुभकामनाओं का यह सिलसिला अनवरत रूप से चलता र...
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यह संसार एक मेला है , यहाँ जो भी आता है अपना समय बिता कर चला जाता है आने - जाने का यह क्रम आदि काल से चला आ रहा है . पूरी कायनात को जब हम देखते हैं तो यह ही महसूस होता है कि इस जहां में कुछ भी नित्य नहीं है , शाश्वत नहीं है . अगर कहीं  कुछ शाश्वत है तो उसे हम...
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गतांक से आगे.....रचनाकर्म में स्पष्टता का अपना महत्व है. हम कुछ भी सृजन कर रहे हैं लेकिन जितनी हमारी विषय और विचार के प्रति स्पष्टता होगी उतना ही हमारा सृजन बेहतर होगा. कालजयी सृजन निश्चित रूप से विषय के प्रति स्पष्टता का ही परिणाम होता है . पूर्वाग्रहों और पक्षपात...
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गतांक से आगे ........!अब तो यह निश्चित हो गया कि उपलब्धि को हासिल करने के लिए साधन से महत्वपूर्ण है साध्य . साधक का लक्ष्य क्या है ?  जिसे वह हासिल करना चाह रहा है . उसके पीछे उसका मंतव्य क्या है ? उसकी भावना क्या है ?  जिसकी भावना जैसी होगी उसे उसके कर...
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कल दोपहर कुर्सी पर बैठा मैं किसी विचार में मगन था. अचानक मेरी नजर सामने खिल रहे फूलों के गमलों पर पड़ी. अनायास ही मेरे चेहरे पर रौनक छा गयी. लगभग 300  गमलों पर दृष्टिपात करने के बाद अचानक मेरी दृष्टि एक सुंदर से खिले फूल पर टिक गयी. बहुत देर निहारा मैंने उसे,...
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जिन्हें हम याद करते हैं वह शरीर रूप में विद्यमान नहीं , लेकिन उनका अनुभव हमारे पास है . उन्होंने जो महसूस करने के बाद अभिव्यक्त किया वह हमारे पास है और जब तक वह हमारे पास है तब तक उनका अस्तित्व बना रहा है , और बना रहेगा .   गत अंक से आगे .........!आखिर क्...
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इस प्रकृति को जब भी भीतर की आँख से देखता हूँ तो बहुत कुछ अप्रत्याशित सा महसूस होता है , और जब इसके करीब जाकर इसको अपने पास महसूस करता हूँ तो भाव विभोर हो जाता हूँ . यह एक बार नहीं बल्कि कई बार होता है . इस अनुभूति का कोई निश्चित क्रम नहीं है . कोई समय नहीं है और को...
केवल राम
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समय : सोचता हूँ तू किसी दिन अगर ठहर जाता तो मेरी सांसों का यह सफ़र भी थोड़ी देर के लिए विश्राम पाता और मैं करता तुझसे बातें तेरे साथ बिताये लम्हों की , और उस वक़्त मुझे लगता तू कहीं नहीं है और मैं भी कहीं नहीं . हम दोनों की एकात्मकता यह स्थापित करती कि जीवन और जग...
केवल राम
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जहाँ तक व्यक्ति को धन की जरुरत जीवन जीने के लिए थी , लेकिन आज वह अपनी लालसाओं की पूर्ति के लिए धन का उपयोग कर रहा है और इस बात को भूल गया है कि " तृष्णा ना जीर्णः, वयमेव जीर्णः "गतांक से आगे .........!हमारी तृष्णा जीर्ण नहीं हो रही है बल्कि हम ही जीर्ण होते जा रहे...
केवल राम
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गतांक से आगे ......!भारतीय जीवन सन्दर्भों को जब हम गहराई से विश्लेशित करते हैं तो हम पाते हैं कि यहाँ जीवन के विषय में बहुत व्यापक और गहन विचार किया गया है . जीवन की सार्थकता को निर्धारित करने के लिए वर्षों से ऋषि मुनियों ने गहन चिंतन किया और जो भी निष्कर्ष निकला उ...