लघुकथा/व्यंग्यमुझे उससे बात करनी थी।‘मेरे पास आज जो कुछ भी है सब ईश्वर का दिया है’, वह बोला।‘जो करता है ईश्वर ही करता है, उसकी मर्ज़ी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता’, वह फिर बोला।‘आप मेरे पास बात करने आए, ईश्वर की बड़ी मेहरबानी है’, एक बार फिर उसने किसी ईश्वर के प्रति अ...