ब्लॉगसेतु

सुशील बाकलीवाल
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        वर्तमान समय के प्रतिस्पर्धी माहौल में हर माता-पिता अपने बच्चे को जीवन की दौड में आगे बढाने के लिये प्राण-प्रण से लगे दिखाई देते हैं इसके लिये आवश्यक खर्च की पूर्ति करने के लिये वे घर व बाहर के मोर्चे पर लगातार अपनी सामर्थ्य से अधिक मेहनत...
kumarendra singh sengar
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आत्महत्या एक ऐसा शब्द है जो सिवाय झकझोरने के और कोई भाव पैदा नहीं करता. यह महज एक शब्द नहीं बल्कि अनेकानेक उथल-पुथल भरी भावनाओं का, विचारों का समुच्चय है. यह शब्द मौत की सूचना देता है. किसी व्यक्ति के चले जाने की खबर देता है. सम्बंधित व्यक्ति के परिचितों के दुखी हो...
Roli Dixit
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मरना ही चाहते हो न तुमतो आराम से मरो और पूरा मर&#...
ज्योति  देहलीवाल
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प्यारे बच्चों, अनेक शुभाशिर्वाद एवं ढेर सारा प्यार! अक्सर किसी भी स्टूडेंट की काबिलियत का पैमाना उसके मार्क्स को माना जाता हैं। अच्छे कॉलेज या यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए अच्छे मार्क्स होना बहुत ज़रुरी भी हैं। लेकिन यदि तुम्हारे कुछ मार्क्स कम आएं हैं त...
kumarendra singh sengar
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एक कार्यक्रम में एक विशेषज्ञ युवाओं और किशोरों से सम्बंधित समस्या पर प्रकाश डाल रहे थे. बातचीत के दौरान उन्होंने आत्महत्या के दो बिंदु बताये. उनके द्वारा बताई चंद बातों का सार ये निकलता है कि एक स्थिति  में आत्महत्या करने वाला व्यक्ति इसकी पूरी तैयारी कर चुका...
कुमार मुकुल
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आखिरकार किसान आ ही गया केंद्रीय बहस के केंद्र में।  राजनेता से लेकर अभिनेता तक सब उसकी मौत पर बयान और टवीट करने लगे हैं। पर इसके लिए उसे दिल्ली आकर अपनी शहादत देनी पडी। अपनी  जान देकर उसने माननीयों की लस्टम पस्टम बहस में जान डाल दी और रंगभेद पर बहस कर...
सुनील  सजल
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लघुकथा - संतुष्ट सोच नगर के करीब ही सड़क से सटे पेड़ पर एक व्यक्ति की लटकती लाश मिली । देखने वालों की भीड़ लग गयी ।लोगों की जुबान पर तर्कों का सिलसिला शुरू हो गया ।किसी ने कहा-"लगता है साला प्यार- व्यार  के चक्कर में लटक गया ।""मुझे तो गरीब दिखता है ।आर्थिक...
Sanjay  Grover
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एक समय की बात है एक अजीब-सी जगह पर, बलात्कार करनेवाले, बलात्कृत होनेवाले, बलात्कार देखनेवाले, बलात्कार का इरादा रखनेवाले सब मिल-जुलकर रहते थे। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); बीच-बीच में वे न जाने किसका विरोध और शिक़ायत करते रहते थे।शायद क...
kumarendra singh sengar
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हँसते-खेलते-कूदते कब हाईस्कूल पास कर लिया पता ही नहीं चला. बोर्ड परीक्षाओं का हौवा भी हम मित्रों को डरा न सका था. हाईस्कूल की परीक्षाओं की समाप्ति को हँसते-खेलते-कूदते इसलिए कहा क्योंकि किसी भी विषय की परीक्षा समाप्त होते ही तय हो जाता था कि कितनी देर के खेल के मैद...
Ravi Parwani
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photo credit : universityex.comHello friends,समय की कमी की वजह से बहुत दिन के बाद यह आर्टिकल लिख पाया हूँ | इस आर्टिकल का विषय है  “ आत्महत्या “ . आज का मेरा आर्टिकल इसी विषय पर है की लोग आत्महत्या क्यूँ करते है ? ऐसा तो क्या हो गया उनकी जिंदगी में जो किस...
 पोस्ट लेवल : lifestyle आत्महत्या Suicide problems