ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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एक कार्यक्रम में एक विशेषज्ञ युवाओं और किशोरों से सम्बंधित समस्या पर प्रकाश डाल रहे थे. बातचीत के दौरान उन्होंने आत्महत्या के दो बिंदु बताये. उनके द्वारा बताई चंद बातों का सार ये निकलता है कि एक स्थिति  में आत्महत्या करने वाला व्यक्ति इसकी पूरी तैयारी कर चुका...
kumarendra singh sengar
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आज खबर पढ़ने को मिली कि कानपुर में चार नाबालिगों ने चार साल की एक बच्ची के साथ सामूहिक दुराचार किया. इन चारों नाबालिगों में से एक की उम्र बारह वर्ष बताई गई है जबकि अन्य तीन की उम्र छह वर्ष से दस वर्ष के बीच है. बच्ची के पिता द्वारा की गई रिपोर्ट के बाद उन चारों बच्च...
kumarendra singh sengar
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सम्बन्ध क्या हैं? रिश्ते क्या हैं? रिश्तों और संबंधों में आपसी सामंजस्य, साहचर्य किस तरह का है? क्या रिश्ते और सम्बन्ध एक ही हैं? क्या रिश्ते और सम्बन्ध आपस में एकसमान भाव रखते हैं? ये ऐसे सवाल हैं जो आये दिन दिमाग में उलझन तो पैदा ही करते हैं, दिल में भी उथल-पुथल...
mahendra verma
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भीड़ में अस्तित्व अपना खोजते देखे गए,मौन थे जो आज तक वे चीखते देखे गए।आधुनिकता के नशे में रात दिन जो चूर थे,ऊब कर फिर ज़िंदगी से भागते देखे गए।हाथ में खंजर लिए कुछ लोग आए शहर में,सुना हे मेरा ठिकाना पूछते देखे गए।रूठने का सिलसिला कुछ इस तरह आगे बढ़ा, लोग जो आए मनाने...
kumarendra singh sengar
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समाज ने लगातार विकास के नए-नए आयामों को प्राप्त किया है. कई-कई नए-नए मानक स्थापित भी किये हैं. इन्हीं में एक मानक शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थापित किया गया है. इक्कीसवीं सदी तक आते-आते शिक्षा क्षेत्र में कई महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुए, कई अत्यावश्यक कदमों को उठाया गय...
kumarendra singh sengar
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अंडमान निकोबार की यात्रा करने की इच्छा बहुत लम्बे समय से मन में थी. इसके मूल में एकमात्र कामना पोर्ट ब्लेयर स्थित सेलुलर जेल के दर्शन करना रहा था. जिस स्थान में देश की आज़ादी के दीवानों ने ज़ुल्म सहकर भी उफ़ तक नहीं की, उस स्थान के दर्शन करने की उत्कंठा सदैव से मन में...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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आओ   अब   अतीत   में   झाँकेंआधुनिकता   ने   ज़मीर  क्षत-विक्षत    कर  डाला   है. भौतिकता   के प्रति   यह   कैसी   अभेद्य   निष्ठा दर्पण  पर  धूल  छतों   पर   म...
केवल राम
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गाँव से बाहर रहते हुए मुझे लगभग 16 वर्ष हुए हैं. 2000 से 2005 के बीच के समय में साल में लगभग दो से तीन महीने गाँव में गुजरते थे. लेकिन 2005 के बाद यह सिलसिला महीने भर का हो गया और अब पिछले तीन-चार सालों से कुछ ऐसा सबब बना है कि साल दो साल में 10-15 दिनों के लिए ही...
kumarendra singh sengar
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अनिश्चय हावी है, हताशा हावी है, निराशा जारी है, इंसान का मरना जारी है. इस हावी रहने में, बहुत कुछ जारी रहने में सबसे बुरा है सपनों का मरते जाना, विश्वास का मिटते जाना. यांत्रिक रूप से गतिबद्ध ज़िन्दगी नितांत अकेलेपन के साथ आगे बढ़ती दिखती है किन्तु आगे बढ़ती सी लगती न...
kumarendra singh sengar
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तरक्की पसंद इंसान के चेतना के द्वार विगत कुछ वर्षों से कुछ अधिक ही खुल रहे हैं. तकनीक का प्रयोग करते हुए जहाँ वो मानवीय रिश्तों के प्रति कुछ हद तक असंवेदनशील हुआ है तो जीव-जंतुओं, पशु-पक्षियों के प्रति कुछ ज्यादा ही संवेदित हुआ है. यहाँ ये समझना थोड़ा मुश्किल ही प्...