ब्लॉगसेतु

मुकेश कुमार
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कहाँ जनता था उसे??? पर कुछ लोगों का ज़िन्दगी में शामिल होने या खोने पर अपना जरा भी बस नहीं होता.. सब यूँ होता है जैसे कोई ख्वाब देखा हो...कब और कैसे, मेरी आभासी दुनिया में शामिल हो गया और फिर उस दायरे को लांघ गया .... बिलकुल दबे पाओं, हौले से,चुपचाप...
संजीव तिवारी
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ब्‍लॉगर बी.एस.पाबला, जी.के.अवधिया व नवीन प्रकाशछत्‍तीसगढ़ पत्रकारिता के भीष्म पितामह श्री बब्बन प्रसाद मिश्र जी के पचहत्तरवें जन्मदिवस एवं सोशल मिडिया फेसबुक के लोकप्रिय ग्रुप "संगवारी" के सालगिरह के शुभ अवसर पर 16 जनवरी को रायपुर में एक गरिमामय कार्यक्रम आयोजित हु...
girish billore
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girish billore
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     सवाक सिनेमा के सौ बरस पूरे तो हुए पर सिनेमाई संगीत के मायने ही बदल गये . आज़ आपको साठ सत्तर के दशक का सिनेमाई संगीत याद होगा. किंतु बेहद बुरी दशा है हिंदी फ़िल्म संगीत की. बकौल गायक आभास जोशी-"फ़िल्में अब गायकों के लिये अनुकूल नहीं रह गईं ह...
girish billore
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 पोस्ट लेवल : आभासी-नाता
girish billore
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 पोस्ट लेवल : आभासी-नाता
Bhavana Lalwani
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वो झील के किनारे बैठी थी. उसके पैर एडियों  तक पानी में डूबे हुए  थे और  उसके लम्बे रेशमी  बाल  उसकी पीठ पर बिखरे थे और ज़मीन को छू रहे थे. उसने एक लम्बा सा  फ्रौक पहन रखा था जिस पर नीले, सफ़ेद और पीले रंग ऐसे लग रहे थे जैसे किसी चित्रक...
zeashan zaidi
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मारिसन जब इं-राफेल और वैशाली को लेकर उस मज़दूर के पास पहुंचा तो वह खुदाई की मशीन के पास मौजूद मशीन आपरेटर की मदद कर रहा था। मारिसन ने मशीन आपरेटर से मशीन रोकने के लिये कहा। मशीन रुक गयी और उस मज़दूर ने अपना चेहरा उनकी तरफ घुमाया। ‘‘यही है! यही है मेरे पति अशोक...
zeashan zaidi
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शहर का निर्माण कार्य आरम्भ हो गया था। समुन्द्र से पानी लाने के लिये पाइप लाइन बिछायी जा रही थी। इस काम में हज़ारों मज़दूर लगाये गये थे। जो आसपास के देशों के स्थानीय निवासी थे।एक ए-सी- टेन्ट में अशोक का निवास था। बाहर हद से ज्यादा गर्मी थी। कभी कभी उसे काम की प...
zeashan zaidi
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जब उसकी आँख खुली तो पूरा बदन पसीने में डूबा हुआ था। और हलक प्यास से सूख रही थी। उसने उठकर फ्रिज खोला और ठण्डे पानी की पूरी बोतल चढ़ा गया। फिर वह उस सपने के बारे में सोचने लगा जो उसने अभी अभी देखा था। बहुत भयानक सपना था वह। ‘‘क्या बात है, वहाँ खड़े क्या सोच रहे...