ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
127
आखिर इतनी बौखलाहट क्‍यों?फिर आखिर इस आन्‍दोलन से आम आदमी पार्टी को इतनी बौखलाहट क्‍यों है कि आन्‍दोलन की अभियान टोलियों के साथ जगह-जगह उनके कार्यकर्ता उलझ रहे हैं, गाली-गलौज कर रहे हैं और पर्चे जला रहे हैं। पिछले एक हफ्ते से उत्‍तर-पश्चिमी दिल्‍ली क्षेत्र...
संतोष त्रिवेदी
199
आदमी ने साँप को,अब डस लिया है,हाथ से अपने, उसी ने, विष पिया है। राजपथ को झाँकता था,दूर से जो,आज उसके द्वार पर,पग धर दिया है। लाठियाँ चारों तरफ़ से, उठ गईं, मूर्ख है, उसने सभी का हक लिया है। बात डरने और मरने की नहीं अब,इतने सालों से कहाँ भी वह जि...
 पोस्ट लेवल : गज़ल ghazal आम आदमी
अजय  कुमार झा
99
आजकल शाम को टीवी पर आने वाली बहसों में सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति दिल्ली कांग्रेस की दिखती है जो चीख चित्कार मचा सिर्फ़ तीस चालीस दिन की बालिग सरकार को भ्रष्टाचारी साबित करने का प्रमाण दे रहे होते हैं और ये पूछने पर कि फ़िर समर्थन काहे टिकाए हुए हैं पलट काहे नहीं देते...
अजय  कुमार झा
99
"आम आदमी सोया हुआ शेर है , उंगली मत करना , जाग गया तो चीर फ़ाड देगा " आजकल यह फ़िल्मी डायलॉग अक्सर टीवी पर देखने सुनने को मिल रहा है ।इसी के साथ मुझे बरसों पुराना कहा गया एक ऐसा ही फ़िल्मी संवाद और याद रहा है कि "शरीफ़ आदमी यदि अपनी पर आ जाए तो उससे बडा बदमाश कोई दूसरा...
अजय  कुमार झा
99
एक महीने की निरी लुटी , पिटी , बिचारी सी आम आदमियों वाली सरकार ने गजब की हुरहुरी मचा दी है ,गरियाए गए और लठियाए भी गए ,कुल दर्जन भर मुकदमा ठोंक दिहिस है भाई लोग ऊ भी एकदम्मे कानूनी , बोलिए तो लीगली लीगली जी ,बनने से पहले से बनने से बाद तक , खुद अपने ही निकल निकल के...
शिवम् मिश्रा
410
पूरे देश ने दिल्ली के कानून मंत्री और पुलिस अधिकारी की बहस देखी ... यही बहस अगर लखनऊ मे हुई होती तो कुछ इस तरह होती :-  मंत्री जी : देखिए अगर आप हमारी बात नहीं मानेगें तो हम आपकी वालिदा मोहतरमा की शान में गुस्ताख़ना कलिमात पेश कर देंगे।  पुलिस अधिकारी : हज़...
संतोष त्रिवेदी
106
जनसन्देश में 22/01/2014 को देश में यह हो क्या रहा है ? घोर अराजकता की हालत है।यहाँ एक सरकार ही धरने पर बैठ गई है।इसे चलाने वाला अपने को आम आदमी कहता है।पहले तो उसने हमें सत्ता से बेदखल किया,हमारी सरकार बनने से रोकी और अब हमें विपक्ष में भी नहीं बैठने दे रहा है।ऐ...
अजय  कुमार झा
99
आज सुबह सुबह जब फ़ेसबुक पर मैंने अपने राजनीतिक विचार और खासकर अपने मंतव्य को स्पष्ट किया तो शाम तक उस पर मित्रों की सूची में से ही कुछ मित्रों ने अपनी भडास निकालने के साथ साथ , जयचंद , राष्ट्रद्रोही के तमगों से नवाज़ने के बाद , और उखड कर हमें लात मार कर अपनी फ़्रैंड ल...
विजय राजबली माथुर
127
Drigvindu Mani Singhकलई खुल रही है और आम आदमी मीडीया की चकाचौंध में भ्रमित हैं। आम आदमी को बदनाम कर रही है आम आदमी पार्टी। मैने ऐसा आम आदमी नही देखा जो अपने ही देश को आम आदमी पार्टी के प्रशान्त भूषन की तरह तोडने की बात करता हो, और कश्मीर को पाकिस्तान को सौंपने...
संतोष त्रिवेदी
106
‘मैं भी आम आदमी हूँ’,यह कहने में अब डर लगने लगा है।पता नहीं,बाजू वाला कब,क्या समझ बैठे ? ख़ास की कैटेगरी में तो हम कभी थे ही नहीं,अब आम से भी वंचित हो गए।जब से ईमानदार लोगों ने आम आदमी पर अपना दावा किया है,हमें अपने आम आदमी होने पर शक पैदा हो गया है।इतिहास गवाह है क...