ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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संतोष त्रिवेदी
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हाल ही में एक निष्कर्ष सामने आया है कि हम भारतीय बड़े आलसी होते हैं।इस अनोखी उपलब्धि की जानकारी हमें तो बहुत पहले से थी,पर दुनिया ने अब जाकर हमारा लोहा माना है।हम मानते हैं कि आलस्य का अपना सौंदर्य होता है।इस बारे में वे बेचारे नहीं जान सकते,जिन्हें इसका कभी सुख नह...
सुशील बाकलीवाल
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             एक गांव में आग लगी । सभी लोग उसको बुझाने में लगे हुए थे । वहीं एक चिड़िया अपनी चोंच में पानी भरती और आग में डालती, फिर भरती और फिर आग में डालती । एक कौवा डाल पर बैठा उस चिड़िया को देख रहा था । क...
हिमांशु पाण्डेय
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मैं चिट्ठाकार हूँ, पर गिरिजेश राव जैसा तो नहीं जो बने तो निपट आलसी पर रचे तो जीवन-स्फूर्ति का अनोखा  व्याकरण- बाउ। संस्कारशील गिरिजेश राव कहूँ?- शृंखलासापेक्ष, पर्याप्त अर्थसबल, नितान्त आकस्मिकता में भी पर्याप्त नियंत्रित। जो प्रकृति का शृंगार है- चाहे वह शोभन...
Kailash Sharma
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एक ब्राह्मण बहुत आलसी, एक गाँव में रहता था,खेत जमीन बहुत थी उसके, लेकिन कुछ न करता था.उसके आलस के कारण, पत्नी बहुत दुखी रहती थी,मैं क्यों काम करूंगा कोई, कहता जब पत्नी कहती थी.एक दिन घर में साधू आया, उसका था सत्कार किया,हाथ पैर उसके धुलवा कर, उसको था जलपान दिया.खुश...
शिवम् मिश्रा
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प्रिये ब्लॉगर मित्रों सादर नमस्कार,प्रस्तुत है आज का बुलेटिन एक अलग विषय पर | उम्मीद है आपका रेस्पोंसे अच्छा मिलेगा कमेंट्स और क्रिटिक के साथ | क्या, ईश्वर आधीन है ? अपने भक्तों का, नहीं ईश्वर आधीन हो गया हमारे विचारों में | ईश्वर को माना है एक एजेंट की तरह या...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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पिछले दिनों क्वचिदन्यतोऽपि की अचानक गुमशुदगी की सूचना चारो ओर फैल गयी। हिंदी ब्लॉग जगत के सबसे सक्रिय ब्लॉग्स में से एक अचानक गायब हो गया। इंटरनेट के सागर में इतने बड़े ब्लॉग का टाइटेनिक डूब जाय तो हड़कंप मचनी ही थी। बड़े-बड़े गोताखोर लगाये गये। महाजालसागर को छाना गया।...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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  आज गिरिजेश भैया ने अपनी पोस्ट से गाँव की याद दिला दी। गाँव को याद तो हम हमेशा करते रहते हैं लेकिन आज वो दिन याद आये जब हम गर्मी की छुट्टियों में वहाँ बचपन बिताया करते थे। अपनी ताजी पोस्ट में उन्होंने पुरानी दुपहरी के कुछ बिम्ब उकेरे हैं। एक बिम्ब देखकर सहसा...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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  ब्लॉग जगत की हलचल से अलग रहते हुए अपनी सरकारी नौकरी बजाने में ही हलकान हो जाने पर मैने मन को समझा लिया कि इसमें बहुत परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऑफ़िस से लौटकर घर आने के बाद शर्ट की बटन खोलने के पहले कम्प्यूटर का बटन ऑन करने की आदत पड़ गयी थी। उसे बड़े जतन स...