ब्लॉगसेतु

Vivek Rastogi
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   हम जब भी कोई नया कार्य शुरु करते हैं, तो उसके बारे में अच्छे और बुरे दोनों विचार हमारे जहन में कौंधते रहते हैं, हम उस कार्य को किस स्तर पर करने जा रहे हैं और उस कार्य में हमारी कितनी रुचि है, इस बात पर बहुत निर्भर करता है। सोते जागते उठते बैठते कई बार...
अजय  कुमार झा
172
वर्ष २००७ में ,ये आलेख , मेरे उपनाम , अजय रमाकांत ( उन दिनों मैं अजय रमाकांत के नाम से लिखा करता था ) से प्रकाशित हुआ था । आलेख को पढने के लिए उस पर चटका लगा दें , और छवि को और बडा करने के लिए दोबारा चटका दें ,और फ़िर आराम से उसे पढ सकते हैं ।
 पोस्ट लेवल : एक प्रकाशित आलेख
हिमांशु पाण्डेय
136
साहित्य क्यों ? (Why Literature ?) : मारिओ वर्गास लोसा (Mario Vargas Llosa)प्रस्तुत है पेरू के प्रख्यात लेखक मारिओ वर्गास लोसा के एक महत्वपूर्ण, रोचक लेख का हिन्दी रूपान्तर । 'लोसा' साहित्य के लिए आम हो चली इस धारणा पर चिन्तित होते हैं कि साहित्य मूलतः अन्य मनोरंज...
 पोस्ट लेवल : nobel prize mario vargas llosa आलेख Translated Works
हिमांशु पाण्डेय
136
साहित्य क्यों? (Why Literature ?):मारिओ वर्गास लोसा (Mario Vargas Llosa)प्रस्तुत है पेरू के प्रख्यात लेखक मारिओ वर्गास लोसा के एक महत्वपूर्ण, रोचक लेख का हिन्दी रूपान्तर । 'लोसा' साहित्य के लिए आम हो चली इस धारणा पर चिन्तित होते हैं कि साहित्य मूलतः अन्य मनोरंजन मा...
 पोस्ट लेवल : nobel prize mario vargas llosa आलेख Translated Works
हिमांशु पाण्डेय
136
साहित्य क्यों ? (Why Literature ?) : मारिओ वर्गास लोसा (Mario Vargas Llosa) प्रस्तुत है पेरू के प्रख्यात लेखक मारिओ वर्गास लोसा के एक महत्वपूर्ण, रोचक लेख का हिन्दी रूपान्तर । 'लोसा' साहित्य के लिए आम हो चली इस धारणा पर चिन्तित होते हैं कि साहित्य मूलतः अन्...
 पोस्ट लेवल : nobel prize mario vargas llosa आलेख Translated Works
गायत्री शर्मा
323
 पोस्ट लेवल : नईदुनिया naidunia yuva आलेख
Vivek Rastogi
50
    आज स्वतंत्रता दिवस है, भारत को आजाद हुए आज ६३ वर्ष हो चुके हैं, पर महत्वपूर्ण और ज्वलंत प्रश्न यह है कि क्या हम वन्दे मातरम और स्वतंत्रता दिवस के सही मायने नई पीढ़ी तक पहुँचा पा रहे हैं ?     जब बच्चे स्कूल में १५ अगस्त को स्कूल मे...
Padm Singh
355
जाने क्यों और कैसे … बचपन में मुझे ऊंचाइयों से गिरने और अजीब अजीब सायों  के बहुत से सपने आया करते … शायद इन्हीं के प्रभाव से धीरे धीरे ऊंचाई से एक डर की  भावना अंदर कहीं घर कर गयी थी .. अगर किसी छत से भी नीचे देखता तो ऐसा लगता कि जैसे अचानक ही नीचे गिर जाऊँगा… या...
Padm Singh
355
वर्षों से रोज़ मोहन नगर की मंदिर,पीर बाबा की मज़ार और हिंडन नदी के किनारे साईं उपवन वाले साईं बाबा के मंदिर पार करते हुए बाज़ार, बहुत सी रिहाईशें और कंक्रीट के फ्लाई ओवर पार करते हुए अपने आफिस पहुँचता हूँ… और इसी रास्ते आना भी होता है… लेकिन मुझे हर आस्था...
 पोस्ट लेवल : आलेख कविता
अजय  कुमार झा
172
दैनिक सच कहूं सिरसा में प्रकाशित आज के दैनिक डेली हिन्द मिलाप , हैदराबाद में प्रकाशित (आलेख को पढने के लिए उसे चटकाएं, और अलग से खुली खिडकी में,...