ब्लॉगसेतु

Shikha Varshney
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होली आने वाली है। एक ऐसा त्योहार जो बचपन में मुझे बेहद पसंद था। पहाड़ों की साफ़ सुथरी, संगीत मंडली वाली होली और उसके पीछे की भावना से लगता था इससे अच्छा कोई त्योहार दुनिया में नहीं हो सकता।फिर जैसे जैसे बड़े होते गए उसके विकृत स्वरुप नजर आने लगे। होली के बह...
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केवल राम
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एक रचनाकार ने किसी पुस्तक में बेशक अपनी व्यक्तिगत भावनाओं, अनुभूतियों और चिंतन को अभिव्यक्ति दी है , लेकिन जब वह कला के माध्यम से अभिव्यक्त  हुई है तो वह पाठक के लिए रोचक और उसके जीवन, उसकी दृष्टि को बदलने वाली होती है .....!! गतांक से आगे…!! एक पुस्तक के माध...
केवल राम
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पुस्तक की महता का कोई पैमाना शायद आज तक निश्चित नहीं हो पाया है कि वह कितनी महत्वपूर्ण है, लेकिन एक संकेत देता चलूँ कि आज जिन रचनाकारों के सामने हम नतमस्तक होते हैं उन चिंतन और व्यक्तित्व अगर किसी माध्यम से हमारे सामने आया है तो वह हैं 'पुस्तकें' ....!गतांक से आगे...
Shikha Varshney
156
पिछले दिनों एक समाचार पत्र में छपी खबर के मुताबिक एक 16 साल के लड़के को 15 हूडी लड़कों ने चाकू से गोदकर बेरहमी से सरे आम सड़क  पर मार डाला . वह बच्चा छोड़ दो  , ऐसा मत करो की गुहार लगाता रहा और वे उसे चा...
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Ashok Kumar
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राकेश बिहारी एक समर्थ कहानीकार ही नहीं, कहानी के एक जिम्मेदार आलोचक हैं. अभी उनकी कथा-आलोचना की पहली किताब शिल्पायन से छप कर आई है. इसी किताब से युवा कहानीकारों (जिन्हें वह भूमंडलोत्तर समय के कहानीकार कहते हैं) की कुछ प्रेम कहानियों पर लिखा उनका लेख आज प्रस्तुत है...
केवल राम
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संवाद स्थापित करना प्राणी की अनिवार्य और महत्वपूर्ण आवश्यकता है. अगर हम यह कल्पना करें कि जब संवाद स्थापित करने के साधन नहीं थे तो जीवन कैसा रहा होगा ? संवाद करना सिर्फ मनुष्य की ही नहीं, प्राणी मात्र की आवश्यकता है. हर एक प्राणी अपने भाव को प्रकट करता है और उसे प...
Shikha Varshney
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यदि विदेशी धरती पर उतरते ही मूलभूत जानकारियों के लिए कोई आपसे कहे कि पुस्तकालय चले जाइए तो आप क्या सोचेंगे? यही न कि पुस्तकालय तो किताबें और पत्र पत्रिकाएं पढ़ने की जगह होती है, वहां भला प्रशासन व सुविधाओं से जुड़ी जानकारियां कैसे मिलेंगी। यह बात शत प्रतिशत सच है।...
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Ashok Kumar
162
कुमार अम्बुज जी का यह लघु आलेख एक बेहद महत्वपूर्ण विषय को उठाता है. एक ख़ास तरह की कविता को "राष्ट्रीय कविता" कहने का चलन रहा है. जैसे अंग्रेजों के ख़िलाफ़ या पाकिस्तान-चीन जैसे "शत्रु" राष्ट्रों के ख़िलाफ़ या फिर राष्ट्र के यशोगान वाली "वीर हिमालय, जान दे देंगे, प...
 पोस्ट लेवल : कुमार अम्बुज आलेख
Shikha Varshney
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कुछ ताज़ी हवा के लिए खिड़की खोली तो ठंडी हवा के साथ तेज कर्कश सी आवाजें भी आईं, ठण्ड के थपेड़े  झेलते हुए झाँक कर देखा तो घर के सामने वाले पेड़ की छटाई हो रही थी।एक कर्मचारी सीढियाँ लगा कर पेड़ पर चढ़ा हुआ था और इलेक्ट्रिक आरी से...
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Ashok Kumar
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(यह आलेख परिकथा के युवा कविता अंक में छपे एक आलेख का परिवर्तित, परिवर्धित और संशोधित रूप है, जिसे ‘चिंतन दिशा’ में समकालीन कविता पर चल रही बहस के लिए फिर से लिखा गया. ) क्रिस लोखार्ट की पेंटिंग यहाँ से (एक) कभी सोचना कि किन अभिशप्त रातों में जन्म हुआ था ह...