ब्लॉगसेतु

अनंत विजय
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इक्कीसवीं सदी का दूसरा दशक समाप्त हो गया और अब हम तीसरे दशक में प्रवेश कर चुके हैं। रचनात्मक लेखन में भी इन दो दशकों में कई बदलाव देखने को मिले। कुछ लेखकों ने अपनी कहानियों में या उपन्यासों में नए प्रयोग किए, भाषा के स्तर पर भी और कथ्य के स्तर पर भी। बावजूद इसके हि...
डॉ. राहुल मिश्र Dr. Rahul Misra
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 शयोक! तुम्हें पढ़ा जाना अभी शेष है...कहते हैं, पहाड़ी नदियाँ बड़ी शोख़ होती हैं, चंचल होती हैं। लहराना, बल खा-खाकर चलना ऐसा,  कि ‘आधी दुनिया’ को भी इन्हीं से यह हुनर सीखना पड़े। पहाड़ी नदियाँ तो बेशक ऐसी ही होती हैं, मगर कभी हिमानियों से अपना रूप और आकार...
Bharat Tiwari
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Love Poems in Hindiहम जानते हैं, जिसका अतीत नहीं होता, उसका भविष्य भी नहीं होता। जो केवल वर्तमान में रहता है, वह किसी प्रकार का रचनात्मक कर्म नहीं संवार सकता। इसलिए सुमन की कविताएं अतीत विरह की नहीं, अतीत अहसास की कविताएं हैं। — मृदुला गर्ग (adsbygoogle =...
Bharat Tiwari
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मार्क्सवाद का अर्धसत्य के बहाने एकालाप— पंकज शर्माअनंत ने पूरी दुनियाभर के जनसंघर्षों को एक नया आयाम प्रदान करने वाले महानायक के निजी जीवन संदर्भों के हवाले से उन्हें खलनायक घोषित कर दिया और भारतीय सामाजिक परंपरा के परिप्रेक्ष्य में उनका मूल्यांकन करने के फिराक में...
संतोष त्रिवेदी
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वे ऊँचे दर्ज़े के आलोचक हैं।हमेशा ऊँचाई में रहते हैं।गोष्ठियों में जाते हैं तो भी ऊँचे दर्ज़े में सफ़र करते हैं।मंच से बोलते समय अपनी ऊँचाई बनाए रखते हैं।साहित्य को ऊँचा ‘उठाने’ में उनका विशेष योगदान है।उन्हीं के सदप्रयासों से साहित्य आज भलीभाँति फल-फूल रहा है।वे त...
अनंत विजय
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हिंदी के चर्चित लेखक और अनुवादक प्रभात रंजन ने फेसबुक पर लिखा, ‘मनोहर श्याम जोशी अक्सर एक बात कहते थे तुम हिंदी वाले हिंदी को ढंग का एक लेखक भी नहीं दे पाए (उनकी मुराद मेरे जैसे हिंदी के विद्यार्थियों से होती थी)। हिंदी के अधिकांश बड़े लेखक वे हैं जो मूलत: हिंदी भा...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) Pankaj Chaturvedi08-09*-2019 कोई सात मिनट लगेंगे, इसके एक एक शब्द को ध्यान से पढ़ें।- - - - - - - ---- - -- जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा, सर...
Ashok Kumar
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कविताओं में जीने वालीं सुमन जी ने इधर उन्होंने कोई एक कविता चुनकर उस पर विस्तार से लिखना शुरू किया है जो हिन्दी की आत्मग्रस्ति से समीक्षाग्रस्ति  तक सिमटी दुनिया में अनूठा सा काम है. चाहूँगा इस आपाधापी और कमेन्ट-लाइक की भागदौड़ से आगे ज़रा ठहर कर पढ़ा जाए.लेख के...
rahul dev
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हजारीप्रसाद द्विवेदी का नाम कबीर के साथ उसी तरह जुड़ा है जैसे तुलसीदास के साथ रामचंद्र शुक्‍ल का। हिंदी में द्विवेदीजी पहले आदमी हैं जिन्‍होंने यह घोषणा करने का साहस किया कि ''हिंदी साहित्‍य के हजारों वर्षों के इतिहास में कबीर जैसा व्‍यक्तित्‍व लेकर कोई लेखक उत्‍पन...
 पोस्ट लेवल : आलोचना नामवर सिंह
मुकेश कुमार
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ह्म्म्म!!कड़क झक्क सफ़ेदटंच बुशर्ट !! फीलिंग गुड !!चुटकी भर रिवाइव पावडरकुछ बूँद टिनोपाल व नील कीडलवा दी थी न !कल पहन कर जब निकला थाथा प्रसन्नचितथा पहना तने चमकते कॉलर के साथधुली सफ़ेद कमीज !!दिन पूरा गुजरागरम ईर्ष्या व जलन भरा दिनदर्द से लिपटी धूल के साथआलोचनाओं की क...