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Basudeo Agarwal
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कल पे काम कभी मत छोड़ो, आता नहीं कभी वह काल।आगे कभी नहीं बढ़ पाते, देते रोज काम जो टाल।।किले बनाते रोज हवाई, व्यर्थ सोच में हो कर लीन।मोल समय का नहिं पहचाने, महा आलसी प्राणी दीन।।बोझ बने जीवन को ढोते, तोड़े खटिया बैठ अकाज।कार्य-काल को व्यर्थ गँवाते, मन में रखे न शंका...
भावना  तिवारी
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कौन समय को रख सकता है, अपनी मुट्ठी में कर बंद।समय-धार नित बहती रहती, कभी न ये पड़ती है मंद।।साथ समय के चलना सीखें, मिला सभी से अपना हाथ।ढल जातें जो समय देख के, देता समय उन्हीं का साथ।।काल-चक्र बलवान बड़ा है, उस पर टिकी हुई ये सृष्टि।नियत समय पर फसलें उगती, और बादलों...
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sanjiv verma salil
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विशेष लेख-                                                        आल्हा रचें सुजान आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ...
 पोस्ट लेवल : आल्हा छंद संजीव sanjiv alha chhand
sanjiv verma salil
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विशेष लेख-                                                        आल्हा रचें सुजान आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ...
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अरुण कुमार निगम
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       (चित्र ओपन बुक्स ऑन लाइन से साभार)आल्हा छंद (16 और 15 मात्राओं पर यति. अंत में गुरु-लघु)बीते कल ने  आने वाले , कल का थामा झुक कर हाथऔर कहा कानों में चुपके , चलना सदा समय के साथ ||सत्-पथ पर पग नहीं धरा औ’ कदम चूम लेती है जीतअधर&n...
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अरुण कुमार निगम
139
सावन पर आल्हा छंद (१६-१५ पर यति, अन्त में गुरु,लघु)[अतिशयोक्ति अलंकार अनिवार्य] देख रहा क्या आँखें फाड़े , ओ मानव मूरख नादान मैं ही तो तेरा सावन हूँ , आज मुझे तू ले पहचान || मौन खड़ा हूँ लेकिन कल तक,पवन किया करती थी शोर शुरू नहीं होता था सावन, ,बादल देते थे झक...
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ऋता शेखर 'मधु'
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जोशीला हर प्रान्त हिन्द का...(आल्हा छंद)हूँक भरो तुम वीर बंकुरो , भरो धनुष में तुम टंकारमातृभूमि पर आँच न आए,करो दुश्मनों का संहारभारत देश जान से प्यारा, भारतवासी की यह शानजाग उठो अब वीर सपूतो, आजादी की रख लो आनऋषियों के यह तपोभूमि है, और वीरों की करमभूमि...