ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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भुरभुरी भूमि पर उगे किरदार-से कँटीले कैक्टसनिर्जन परिवेश पर उकताकर कुंठित नहीं होतेये भी सजा लेते हैं अपने तन पर काँटों संग फूल   सुदूर पर्वतांचल में एक मोहक महक से महकती स्वागतातुर वादी  रंग-विरंगे सुकोमल सुमन...
ANITA LAGURI (ANU)
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आवारा बादल,शोर मचाते,धोखेबाज   बादल,छत पर आकर,उछल-कूद करते,नखरीले बादल,पास जाकर देखूँ तो,दूर कहीं छिप जाते बादल,मनमर्ज़ी करते ,विशालकाय बादल!@अनीता लागुरी "अनु"
 पोस्ट लेवल : कविता आवारा बादल
Bhavna  Pathak
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                      भौं भौं भौं ... भूरा ( कुत्ता ) पूरी कालोनी में मुनादी करता जा रहा था कि उत्तर वाली बाउंड्रीवाल के पास खाली प्लाट पर आज रात एक अति आवश्यक मीटिंग रक्खी गई है। इस मीटिंग में सभी की उपस्थिति...
Tejas Poonia
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संयोग ही है कि 1 जून को नरगिस का जन्मदिन होता है...
विजय राजबली माथुर
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   एक नई पीढ़ी अपने से ऊपर की पीढ़ी से अधिक जड़ और दकियानूसी हो गई है। यह शायद हताशा से उत्पन्न भाग्यवाद के कारण हुआ है। अपने पिता से तत्ववादी, बुनियादपरस्त (फंडामेंटलिस्ट) लड़का है। दिशाहीन, बेकार, हताश, नकारवादी, विध्वंसवादी बेकार युवकों की यह...
दीपक बाबा
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जिंदगी सिसकती चलती है - जिंदगी के शोरो शराबे के बीच.कसम से,बड़ी ही बेकार बोझिल सी है ये जिंदगी... कसम से; नोटों की गड्डी माफिक  जितना भी गिनो ९९ या फिर १०१ ही निकलते हैं, कभी १०० क्यों नहीं... उन्हें १०० बनाने के लिए कई बार गिनना पढता है. थूक लगा लगा कर.. थूक...
 पोस्ट लेवल : आवारा मन जिंदगी
दीपक बाबा
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राजू, कैम्प कार्यालय : खुंदकपुरदिनाक : २५ दिसंबर २०११ मानस चक्रबोर्ती अंधकपुरदिखिए कैसी विडंबना है कि आपको अपने कुल का नाम अभी तक याद है... जबकि अभी तक कई लोग कुलनाम याद रखते हुए भी अपने कुल को भूले बैठे हैं... और इसके लिए वो उक्त जानकारी ग...
 पोस्ट लेवल : आवारा मन जिंदगी
दीपक बाबा
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हर वक्त मैं, कहीं न कहीं, किसी न किसी साथ, स्वयं को खड़ा पाता हूँ,कभी रेल हादसे में मारे गए मृतकों के परिजनों के साथ...मुआवजा पाने वाले लोगों की कतार में,कभी माल के लिए उजाड़ी गई झोपडपत्तिओं में टूटे चूल्हों से उठते धुओं के गुबार में रंगारंग समाराहो के बाद वीरान हल...
 पोस्ट लेवल : आवारा मन जिंदगी
दीपक बाबा
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आप व्यापारी है या फिर कंपनी में पी आर ओ, हमेशा चेहरा पोलिश और इस्टाइलीश रखना पड़ेगा, नहीं तो ग्राहकों पर आपकी बातों कर प्रभाव नहीं पड़ेगा.ग्राहक आपकी बीमार/मलीन सूरत देख कर दूकान से भाग खड़े होंगे और आप हाथ में की-बोर्ड थामे भाएँ भाएँ करती मक्खियों माफिक...
 पोस्ट लेवल : आवारा मन जिंदगी