ब्लॉगसेतु

मधुलिका पटेल
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दम घुटने के बाद की बची सांसें खर्च तो करनी ही होती हैं एक उम्र उन्हें खींचती रहती है जीने के लिए आस पास आशा निराशा के बीच जो छोटी खुशियाँ बची होती है हर पड़ाव पर मील का पत्थर जर्द है शायद आगे कुछ लिखा होगा मन समझाता है&nb...
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भूमिका‘‘नागफनी के फूल’’ अनुपम दोहा कृति         हिन्दी साहित्य में दोहा छन्द का अपना गौरवशाली इतिहास है। सन्तों की वाणी से निकले संदेश आज भी सतत रूप से लोक में व्याप्त हैं और उनका माध्यम दोहा छंद ही बना है। दोहा अर्द्ध सम मात्रिक छन्द...
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--जलने को परवाना आतुर, आशा के दीप जलाओ तो।कब से बैठा प्यासा चातक, गगरी से जल छलकाओ तो।।-- मधुवन में महक समाई है, कलियों में यौवन सा छाया,मस्ती में दीवाना होकर, भँवरा उपवन में मँडराया,मन झूम रहा होकर व्याकुल, तुम...
Akhilesh Karn
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); फिल्म : बलमा नादानगायक : आशा भोंसलेगीतकार: संगीतकार: श्याम कुमार गरजे बरसे रे बदरियाबड़ा डर लागे रे रसियाहो गरजे बरसे रे बदरियाबड़ा डर लागे रे रसियाथर थर कांपे रे करजवाजुलमी लेले रे गोदिया...
sanjiv verma salil
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दोहा सलिलाआशा*आशा मत तजना कभी, रख मन में विश्वास।मंजिल पाने के लिए, नित कर अथक प्रयास।।*आशा शैली; निराशा, है चिंतन का दोष।श्रम सिक्का चलता सदा, कर सच का जयघोष।।*आशा सीता; राम है, कोशिश लखन अकाम।हनुमत सेवा-समर्पण, भरत त्याग अविराम।।*आशा कैकेयी बने, कोशिश पा वनवास।अह...
 पोस्ट लेवल : आशा दोहा सलिला
sanjiv verma salil
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शारद वंदन(मात्रिक लौकिक जातीयवर्णिक सुप्रतिष्ठा जातीयनवाविष्कृत आशाकिरण छंद)सूत्र - त ल ल।*मैया नमनचाहूँ अमन...   ऊषा विहँस   आ सूर्य सँग   आकाश रँग   गाए यमन...पंछी हुलसबोलें सरसझूमे धरणिनाचे गगन...   माँ! हो सदय&n...
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मित्रों!मेरा दोहा संग्रह "नागफनी के फूल"छपकर आ गया हैप्रस्तुत है आदरणीय जयसिंह आशावत जी के द्वारालिखी गयी भूमिका।‘‘नागफनी के फूल’’ अनुपम दोहा कृति                हिन्दी साहित्य में दोहा...
Akhilesh Karn
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); गायक :  आशा भोंसले व साथीफिल्म/एल्बम:  सजनवा बैरी भइले हमारगीतकार:  समीरसंगीतकार:  चित्रगुप्तलेबल:  वीनस (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); हो हो हो हो हो ह...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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आशा जन्म लेती है स्वप्निल स्वर्णिम सुखी आकाश-सा कैनवास लिए जुड़ जाती है नवजात के साथ जन्म से तीव्र हो उठती है किशोर वय में युवाओं में चहकती है / फुदकती है सुरमई लय में न जलती है न दफ़्न होती है बुढ़ापे की अंतिम सांस के स्थिर होने पर कमज़ोर नहीं पड़त...
Yashoda Agrawal
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बदले समय के  साथ में  बढ़ती जनसंख्या के भार सेबड़े मकानों का चलन न रहा  रहनसहन का ढंग बदला |पहले बड़े मकान होते थेउनमें आँगन होते थे अवश्यदोपहर में चारपाई डाल महिलाएं बुनाई सिलाई करतीं थीं धूप का आनंद लेतीं थीं |अचार चटनी मुरब्बे में...
 पोस्ट लेवल : आशा लता सक्सेना