ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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उसकी ख़ामोशी खँगालती है उसे, वो वह  नहीं है जो वह थी, उसी रात ठंडी पड़ चुकी थी देह उसकी, हुआ था उसी रात उसका एक नया जन्म, एक पल ठहर गयीं थीं साँसें उसकीं,   खुला आसमां हवा में साँसों पर प्रहार, देख चुकी थी अवाक-सी वह,&nbsp...
rishabh shukla
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जिनको जीना है,वो उनकी आँखों से जाम पिया करेंऔर इसी तरह अपने जीने का सामान किया करेंखुदा किसी के मकाँ का शौकीन तो नहीं रहातो दिल में ही कभी आरती तो कभी आज़ान किया करेंहमेशा दूसरों की नज़र में ही अहमियत जरूरी है क्याकभी तो खुद को भी खुद का ही मेहमान किया करेंइश्क़ की बा...
Yashoda Agrawal
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रो रहा आसमाँ ये जमीं देखकर,उसकी आँखों में बसती नमी देखकर,इस कदर तेरे टुकडे किये क्या कहूं,शर्म आती है ये आदमी देखकर,लूट कर तेरी कीमत लगाते है जो,खुद को दुनिया का मालिक बताते है जो,खुद को इन्सान कहते है ये मतलबी,उनमे इंसानियत की कमी देखकर,रो रहा आसमाँ ये जमीं द...
Nitu  Thakur
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रो रहा आसमाँ ये जमीं देखकर,उसकी आँखों में बसती नमी देखकर,इस कदर तेरे टुकडे किये क्या कहूं,शर्म आती है ये आदमी देखकर,लूट कर तेरी कीमत लगाते है जो,खुद को दुनिया का मालिक बताते है जो,खुद को इन्सान कहते है ये मतलबी,उनमे इंसानियत की कमी देखकर,रो रहा आसमाँ ये जमीं द...
संजय भास्कर
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आखिर बुरा क्या है ? *********************************** मन के दरख्त पर  जमा ली  ख्वाहिशो ने अपनी जड़े  और फलती फूलती जा रही है  अमर बेल की तरह उतरोतर. रसविहीन दरख्त मौन है  बना हुआ पंगु सा  जब होगा एहसास हकीकत का  तो हो...
विनय प्रजापति
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सरफ़राज़ शाकिरसम्ते-कुहसार क्या है देखो तोआसमाँ झुक रहा है देखो तोबन गयी झील आइने जैसीअक्स उठा हुआ है देखो तोदूर तक नक़्शे-पा ही नक़्शे-पारास्ता हो गया है देखो तोमेरा साया जो साथ था अब तकरात से जा मिला है देखो तोपेड़ सारा बिखर गया लेकिनजूँ का तूँ घोंसला है देखो तोदश्त म...
विनय प्रजापति
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शायिर: अरूण साहिबाबादीपुरानी चीज़ों को इक दिन वह ख़ाक में मिलाता हैमगर इस ख़ाक से ही फिर नयी दुनिया बनाता हैउसे मीठा बनाकर बाँटता है सारी धरती परकि सूरज जितने पानी को समन्दर से उठाता हैउसे ठुकरानी पड़ती है सहर की नींद की लज़्ज़तवो सबसे पहले उठता है जो औरों को जगाता है...