ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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जेलों में  जिस्म तो क़ैद रहे  मगर जज़्बात  आज़ाद रहे महामूर्खों के  दिमाग़ की उपज  बेवक़ूफ़ कीड़े-मकौड़े  खाए जा रहे काँटों के बीच मनोमालिन्य से परे आशावान अंतरात्मा के पलते मीठे बेर   चीख़-चीख़करअपने पकने की म...
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आसमान का छोर, तुम्हारे हाथों में।कनकइया की डोर तुम्हारे हाथों में।।--लहराती-बलखाती, पेंग बढ़ाती है,नीलगगन में ऊँची उड़ती जाती है,होती भावविभोर तुम्हारे हाथों में।कनकइया की डोर तुम्हारे हाथों में।।--वसुन्धरा की प्यास बुझाती है गंगा,पावन गंगाजल करता तन-मन चंगा,सरगम क...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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पसीने से लथपथ बूढ़ा लकड़हारा पेड़ काट रहा है शजर की शाख़ पर तार-तार होता अपना नशेमन अपलक छलछलाई आँखों से निहार रही हैएक गौरैया अंतिम तिनका छिन्न-भिन्न होकर गिरने तक किसी चमत्कार की प्रतीक्षा में विकट चहचहाती रही न संगी...
YASHVARDHAN SRIVASTAV
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रात के आसमान में सैकड़ों तारे है समाए फिर इकलौते सूरज दादा के खिलने पर ही...
Yashoda Agrawal
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रेल में खिडकी पर बैठीमैं आसमान ताक रही हूँअलग ही छवियाँ दिख रही हैं हर बारऔर उनको समझने की कोशिशमैं हर बार करती कुछ जोड़ती, कुछ मिटाती अनवरत ताक रही हूँआसमान के वर्तमान को याअपने अतीत कोऔर उन छवियों मेंअपनों को तलाशतीमैं तुम्हें देख पा रही हूँवहाँ कितने ही...
PRABHAT KUMAR
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ये वेदना असीम भावों की आज कविता बन कर कुरेद रही है...मन हुआ व्यथित अब आसमान में उड़ने को करता हैकभी हवा में उड़ने का तो कभी समुद्र में बहने का करता है आतंकी करतूते हों या पुलिसिया कुप्रबंधन होएक-एक करके सबसे लड़ने का मन करता हैबहुत हुआ कुप्रचार नेताओं का, ताना बा...
sanjiv verma salil
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मुक्तक:संजीव .आसमान कर रहा है इन्तिज़ार तुम उड़ो तो हाथ थाम ले बहार हौसलों के साथ रख चलो कदममंजिलों को जीत लो, मिले निखार*२३-४-२०१५http://divyanarmada.blogspot.in/
 पोस्ट लेवल : muktak आसमान asman मुक्तक
Aparna  Bajpai
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आओ हम थोड़ा सा प्रेम करेंमहसूसें एक दूसरे के ख़यालात,एहसासों की तितलियों कोमडराने दें फूलों पर,कुछ जुगुनू समेट लें अपनी मुट्ठियों मेंऔर ...... रौशन कर देंएक दूसरे के अँधेरे गर्त,आओ बाँट लें थोड़ा-थोड़ा कम्बल,एक दूसरे के हांथों का तकिया बनाबुलाएं दूर खड़ी नींद,ठिठुरती रा...
मुकेश कुमार
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'पापा' तो होते है 'आसमान'एक बेहद संजीदा अभिव्यक्तिकहती है ये फिर अंतिम बार उनसे मिलनेसमय के कमी की वजह सेकर रहा था हवाई यात्राबेहद ऊंचाई पर था शायदपड़ रहा था दिखाईविंडो के पार दूर तलकफटा पड़ा था आसमानबिखड़े थे बादलों के ढेर इधर-उधरपापा दम तोड़ चुके थे।तेज गति से भ...
PRABHAT KUMAR
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सितारे खुद की चमक खोने लगे हैंआसमान की गोद में रोने लगे हैंमैं भी एक बचपन का सितारा थाअपने प्रियजनों को बहुत प्यारा थापाकर प्यार अभिमान छा गया थाक्रूद्ध होकर भी शांत हो जाता थास्नेह में उनके सामान्य हो जाता थादेखो बुझ गया दीपक घर का मेरेवो पतंगे कोई और घर ढूढ़ने लगे...